Anar

Anar, Pomegranate in Hindi

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 अनार एक रसदार फल है जो हमारे देश में सर्वत्र पाया जाता है। यह फल भारतेतर देशों जैसे अरब, ईरान, अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, जापान, दक्षिणी यूरोप और अफ्रीका में भी कसरत से पाया जाता है, कहीं छोटे और कहीं बड़े आकार में। 


विभिन्न नाम 


अनार को संस्कृत में दाडिम व दन्त बीजक कहते हैं । Promegrnate in hindi- हिन्दी में अनार व दाडिम; मराठी में डालिंब; गुजराती में दाड़यम व दाड़म ; बँगला में दाडिम व दाड़मी; तैलङ्गी में दान्निम पंडु; Anar in english-अंग्रेजी में प्रोमेग्रेनेट (Promegranate); तथा लैटिन में इसे प्युनिका ग्रेनेट (Punica granate) कहते हैं । 


 माना स्वाद की दृष्टि से अनार तीन प्रकार का होता है-मीठा, खट्टा व खटमिट्ठा । उत्पत्ति की दृष्टि से इसके २ भेद हैं-जंगली और बागी । एक प्रकार का अनार और होता है-गुलनार, जिसमें केवल फूल ही उगते हैं, फल नहीं। इसको नर अनार भी कहते हैं। 


मीठा अनार-


काबुल, कंधार और अरब के पास के मरु प्रदेशों में पाया जाने वाला अनार उत्तम किस्म का, आकार में बड़ा, सुस्वादु, अत्यन्त मीठा, काफी रसीला तथा मुलायम बीजों वाला होता है। इस मीठे अनार की एक किस्म को बेदाना कहते हैं। 


मीठा अनार त्रिदोषनाशक, तृप्तिकारक, शुक्र- जनक, हल्का, कुछ कसैला, मलावरोधक, स्निग्ध, मेधा- जनक, स्मरणशक्तिवर्द्धक, बलवर्द्धक, ग्राही, दीपन, तथा तृषा, दाह, ज्वर, हृदयरोग, मुख दुर्गन्ध, कण्ड रोग एवं मुख रोग नाशक है। यह सौन्दर्यकारक, रक्त- वर्द्धक, पाचक, मूत्रल, रुचिकारक, पौष्टिक, पित्त- नाशक, संकोचक तथा कृमिनाशक भी होता है । 


मीठे अनार का रस रुचिकारक, पाचक, दीपक, बलकारक एवं तरल होता है । ज्वर, क्षय, अतिसार, मियादी बुखार, खूनी बवासीर के रोगियों के लिये बड़ा लाभकारी होता है। बच्चों को मीठे अनार का रस देने से वे पुष्ट होते हैं ।


खट्टा अनार-


रूक्ष, रक्तपित्तकारक, तथा वात- कफनाशक है। इस स्वाद का अनार अपने देश में बहुत होता है।


 खटमीठा अनार-


यह दीपन, रुचिकारक, वात पित्तनाशक तथा हल्का होता है। अनार के वृक्ष में वैसे हर मौसम में फूल लगे होते हैं, परन्तु चैत और बैसाख में उसमें अधिक फूल लगते हैं। भारत में अनार का फल असाढ़ से भादों तक पकता है । और जगह जलवायु और मौसम के अनुसार अलग-अलग समयों पर यह फूलता और पकता है। 


Pomegranate in Hindi


रासायनिक संगठन -


 खनिज पदार्थों में फॉस्फोरस, लोहा व चूना अनार में विशेष रूप से पाये जाते हैं। " अनार के वृक्ष और फल की छाल में २२ से २५ प्रतिशत टैनिन (Tannin) होता है । इसके अतिरिक्त मैनाइट (Mannite) पेक्टीन (Pectin), एक प्रकार का तरल क्षारीय सत्व, एक तैलीय द्रव आइसो पेलीटियरिन (Isopelletierine) आदि तथा भस्म १५ प्रतिशत होती है। अनार में विटामिन सी भी होता है।


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 अनार के स्वास्थ्यवर्द्धक गुण 


हर प्रकार के रोगियों के लिये अनार का रस बहुत ही उपयोगी होता है । इससे क्षीण हुए रोगी पुनः शक्ति जल्दी प्राप्त करते हैं तथा उनके शरीर के दोषों को दूर करने में उचित औषधियों को अनार-रस द्वारा बड़ी सहायता मिलती है। अनार के सेवन से गुर्दे, छोटी व बड़ी आँत, आमाशय, यकृत और कण्ड के रोग जल्दी नहीं होने पाते। हृदय को शक्ति प्रदान करने के लिये अनार जगत- प्रसिद्ध है। 


Anar khane ke fayde


1.अजीर्ण)-खूब पके अनार के १ तोला रस में समभाग भुना हुआ जीरा और गुड़ मिलाकर दिन में २ या ३ बार लेने से हर प्रकार का अजीर्ण शीघ्र नष्ट हो जाता है। 


2.अरुचि)-अनार का रस, शहद और तिल-तेल समभाग मिलाकर कुल ५ तोले में जीरा और खाँड ६-६ माशे मिलाकर मुंह में भरें और थोड़ी देर मुख को चलावें । जब आँख व नाक से पानी निकलने लगे तो कुल्ला कर दें और फिर नया रस मुँह में भरें । यह प्रयोग दिन में ८ या १० बार करें । इस प्रयोग से मुँह का स्वाद अच्छी हो जावेगा और अरुचि मिट जावेगी । 


3.दस्त में)-अनार-वृक्ष की की छाल को सुखा कर उसका चूर्ण करें । १ तोला इस चूर्ण में ६ माशे जीरे का चूर्ण मिलावें और १ तोला पुराना गुड़ और इस मिश्रण को दस्त के रोगी को सेवन करावें, लाभ होगा ।


 4.खून के दस्त)-अनार-फल की छाल और कड़वा इन्द्रजौ २-२ तोले जौकुट कर ६४ तोले जल में मिला काढ़ी बनावें । जब चौथाई बच रहे तो उसे रोगी को पिला दें । यह प्रयोग दिन में ३ बार सुबह, दोपहर व शाम को करें। यदि दस्त के साथ ऐंठन भी हो तो काढ़ा बनाते वक्त उसमें हरत्ती अफीम भी मिला दें । 


5.कृमि रोग)-अनार की जड़ की छाल ५ तोले, पलास (ढाक) के बीज ६ माशे, वायविडंग १ तोला और जल सवा सेर । सबको कूटकर एक में मिला ढक्कन से ढककर मन्दाग्नि पर पकावें । पकते-पकते जब आधा जल शेष रहे, तब उतार ले और शीतल हो जाने पर छान लें, और ५-५ तोले की मात्रा में आधे-आधे घण्टे पर रोगी को ४ बार पिलावे । इससे सब प्रकार के पेट के कीड़े निकल जाते हैं । इस काढा के पीते ही पेट के कीड़े कलबला कर अपनी जगहें छोड़ देते हैं । अत: फिर कीड़े स्थिर न होने पावें इसलिए रेंडी के तेल का जुलाब देकर उन्हें निकाल देना चाहिए । या नमक मिला एनिमा दे देना चाहिए ।


Anar khane ke fayde


6. खाँसी)-अनार का छिल्का ४ तोला, कालीमिर्च १ तोला, पीपल और जवाखार ६-६ माशे लें। अब ८ तोले गुड़ की चाशनीकर और उसमें सबका महीन चूर्ण मिला ४-४ रत्ती की गोलियाँ बना लें और २-२ गोली दिन में ३ या ४ बार गर्म जल से सेवन करें । इससे হवास में भी लाभ होता है। केवल अनार-फल के छिल्के को मुख में रखकर चूसने से भी खाँसी में लाभ होता है ।


 7.हृदय की धड़कन)-१ तोला अनार के ताजे पत्ते को १० तोला पानी में पीस कर और छानकर सुबह- शाम पीने से हृदय की धड़कन में लाभ होता है।


8. राजयक्ष्मा में)-मीठे अनार के २० तोले रस में पीपल, सफेद जीरा, सोंठ और दालचीनी का चूर्ण ४-४ तोला, उत्तम केसर १ तोला तथा पुराना गुड़ २० तोला धीमी आँच पर पकावें । गोली बनाने योग्य गाढ़ा हो जाने पर नीचे उतार उसमें १ तोला छोटी इलायची का चूर्ण मिला ६-६ माशे की गोलियाँ बना लें। प्रातःसायं १-१ गोली खाकर ऊपर से १ पाव बकरी का दूध पीवें, राजयक्ष्मा में लाभ होगा ।


 9.गर्भ स्राव)-२ तोला अनार के ताजे पत्तों को लेकर १० तोला जल के साथ पीस कर और छानकर पिलाते रहने से, तथा पत्तों को पीसकर उसका लेप पेडू पर लगाते रहने से गर्भ स्राव या गर्भपात नहीं होने पाता। 


10.श्वेत प्रदर)-अनार का पत्ता ताजा २ तोला, कालीमिर्च १ माशा । दोनों को १० तोले जल में पीसकर छान लें और प्रातः सायं श्वेतप्रदर की रोगिणी को पिलावें, साथ हो अनार की जड़ की छाल आध सेर को जौकुट कर ३ या ४ सेर पानी में पकावें । जब एक सेर पानी शेष रहे तो उस पानी से योनि में डूश दें तथा मलमल कपड़े के टुकड़े को उस पानी में भिगोकर योनि में कुछ देर तक रखें।


11. भगंदर)-अनार के १० तोले ताजे पत्तों को १ सेर पानी में पकावें । आधा पानी शेष रहने पर छान- कर दिन में २ या ३ बार उससे गुदा को धोएँ, भगंदर दूर होगा । गर्भाशय के बाहर निकल आने पर भी यह प्रयोग उपकारी होता है ।

 इस दशा में रुग्णा स्त्री को छाया में सुखाये अनार पत्नों के ६ माशा कपड़छान किये हुये महीन चूर्ण को प्रातः सायं ताजे जल से सेवन भी कराना चाहिए । 


12.पीलिया)-१ पाव मीठे अनार के रस में ३ पाव देशी चीनी मिलाकर चाशनी बना लें और दिन में ३-४ बार सेवन करें, पीलिया रोग धीरे धीरे दूर हो जायगा। 


13.सिरदर्द) - छाया में सुखाये अनार के आध सेर पत्तों में समभाग सूखी धनियाँ मिला महीन पीस लें । फिर उसमें १ सेर गेहूँ का आटा दो सेर गो घृत में भूनकर और ठंढा होने पर ४ सेर खाँड मिला लें । इसे ३ से ५ तोले की मात्रा में रोज प्रात: सायं गरम दूध के साथ खायँ, सिरदर्द व सिर चकराना आदि सब दूर हो जायगा। 


14.नकसीर)-खटमिट्ठे अनार के १० तोले रस में २ तोले मिश्री मिला रोज दोपहर को पीने से गर्मी मैं नाक से होने वाला रक्तस्राव बंद हो जाता है। 


15.नेत्र-विकार)-अनार के पत्तों को पानी में पीस - कर आँखों पर दिन में २ बार लेप करने तथा पत्तों को पानी में भिगोकर पोटली की तरह आँखों पर फेरने से दुखती आँखों में लाभ होता है ।


 16.गंजापन)-अनार के पत्तों के १ सेर रस में १० तोले पत्तों की लुगदी और आध सेर सरसों का तेल मिलाकर पकावें। जव सब चीजें जल जायेँ और केवल तेल रह जाय तो उसे छानकर रख लें और गंजे सिर पर लगावें, बाल उग आवेंगे ।