Apple in Hindi

Apple in Hindi

इस पोस्ट में हम Apple in hindi,Apple Meaning in hindi,seb khane key fayde मे बात करेंगे।एप्पल (Apple) को हिंदी में सेब कहते हैं। Apple का मीनिंग सेब है। अब हम सेब के बारे में जानेंगे।

सेब देखने में जितना सुन्दर और आकर्षक होता है, खाने में उतना ही मीठा और स्वादिष्ट होता है । इसीलिये इसको फलों का राजा कहा जाता है । पर यह कम लोगों को ज्ञात है कि सेब का सम्बन्ध 'रोजासेई' (Rosaceae) नामक गुलाब परिवार से है। इस फल के गुलाबी और सफेद फूल जंगली गुलाब के फूलों की तरह होते हैं । 


सेब एक प्राचीन फल है । कहते हैं, इस फल का विकास 'क्राब सेब (Crab Apple ) से हुआ जो यूरोप के विभिन्न भागों में बहुतायत से पाया जाता है । 'क्रैब सेब' आकार में छोटा तथा स्वाद में कड़वा होता है।


 परंतु कुछ वनस्पति अन्वेषकों का मत है कि सेब एक भारतीय फल है, क्योंकि इसका वर्णन भारत के प्राचीन तथा आयुर्वेदीय ग्रन्थों, जैसे चरक, सुश्रुत, तथा भावप्रकाश आदि में पाया जाता है।


 हमारे देश में यह फल मुख्यतः कश्मीर, कुल्लू की घाटी, नीलगिरी, हिमालय प्रदेश, तथा उत्तरी गढ़वाल की भोट पट्टी में होता है। परन्तु सबसे अधिक तथा मीठा एवं उत्तम सेब कश्मीर में ही पाया जाता है। काबुल में भी अच्छे किस्म का सेब मिलता है। भारत में ही नहीं सारे विश्व में सेब का विस्तार अन्य फलों के विस्तार से अधिक है । यह सुदूर उत्तर में पाया जाता है।


 इंग्लैण्ड की जलवायु तथा मिट्टी इसके लिये सर्वथा उपयुक्त है वहाँ यह और देशों के सेबों से अच्छी किस्मों में पाया जाता है। प्लीनी दि एल्डर का मत है कि रोम वासियो को सेब के बारे में बहुत पहले से ही ज्ञान था। उन्हें सेब की लगभग २२ जातियों का पता था । सन् १६०० तक यूरोप में बहुतायत से पाये जाने वाले सेब विशेषत: हरे रंग के होते थे। आजकल संसार में सेब की लगभग २०००जातियाँ पायी जाती हैं, परन्तु फलों की दुकानों में केवल २०-३० जातियाँ ही देखी जाती हैं।


 मैलस पुमिला जिससे सेब की अनेक जातियाँ विकसित की गई हैं, मुख्य रूप से दक्षिणी-पूर्वी यूरोप तथा दक्षिणी-पश्चिमी एशिया का फल है। कुछ फलं- विशेषज्ञों का कथन है कि इसकी उत्पत्ति काकेशस के दक्षिण में हुई। यूरोप में सेब की विभिन्न किसमें आज से लगभग २००० वर्ष पूर्व पहुँची। पर इंग्लैण्ड में सेब का विशेष रूप से प्रचलन रोमवासियों ने किया।


 पर अब इस फल ने विश्व के सबसे प्रिय फल का स्थान ग्रहण कर लिया है और सम्पूर्ण शीतोष्ण कटिबन्ध में तथा भूमध्यरेखावर्ती क्षेत्र के दोनों ओर स्थित प्रायः सभी देशों में पैदा होता है। विश्व में शायद ही कोई ऐसा फल हो जिसका प्रसार सेब के समान विस्तृत हो।


 जयदातर सेब लाल ही होते हैं, किन्तु हरे और पीले रंग के सेब भी पाये जाते हैं, साथ ही वनस्पति शास्त्रियों ने अब एक ऐसे किस्म का सेब पैदा किया है जिसमें बीज नहीं होता और साधारण सेबों से अधिक सुस्वादु और मीठा होता है। 

Apple meaning in Hindi


सेब के विभिन्न नाम


 सेब को संस्कृत में मुष्टिप्रमाण, महाबदर, सेब, सिचितिका फल, स्र्रवम् तथा अमृत फल; हिन्दी में सेब( Apple in Hindi), सेव, सफरजंग; मराठी में मोठे बोर, सफर- चंद; गुजराती में सफरजन; बँगला में सेब ,फार्सी में सेव, कतल; कन्नड़ में सिब, किट्टालय; अंग्रेजी में ऐपिल (Apple) ; तथा लैटिन में मेलस सिल्वेस्ट्रिस मिल (Malus-sylvestris mill) कहते हैं । सेब को वैज्ञानिक भाषा में पायरस मैलस लिन (Pyrus malus linn) कहते हैं ।


रासायनिक विश्लेषण


वैज्ञानिकों द्वारा सेब के रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि इसमें ०. ३% प्रोटीन,०.१% कैल्सियम, ०.०२% फॉस्फेट, तथा १.७% लोहा होता है । इनके अलावा इसमें शर्करा, पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, सल्फर, केरोटीन, थियामीन, रिबोफ्ले बिन, तथा कई विटामिन भी पाये जाते हैं ।

 

सेब में फॉस्फोरस और कैल्सियम अधिक मात्रा में विद्यमान होता है । सब प्रकार के विटामिनों के अतिरिक्त इसमें विटामिन ए, बी, सी, और डी अधिक मात्रा में विद्यमान रहते हैं, जिनमें विटामिन बी की मात्रा अधिक होतो है। एक पाव सेब में लगभग १०० यूनिट विटामिन बी पाया जाता है।


 सेब में एक प्रकार का अम्ल तत्त्व भी होता है जिसकी मात्रा शर्करा के साथ साथ बढ़ती है। इस अम्ल तत्त्व में यह गुण होता है कि शरीर में शर्करा के समान ही इंधन के रूप में प्रयुक्त होता है । यह अम्ल तत्त्व सेब में ०.१६ से १.११ प्रतिशत तक पाया जाता है। इसमें एक गुण यह भी है कि यदि सेब को खूब चबा चबाकर खाया जाय तो वह दाँत व मसूढ़ों के लिए ऐण्टीसेप्टिक का भी कार्य करता है । इसी वजह से चिकित्साशास्त्रियों का कथन है कि दाँत के रोगियों के लिए सेब अत्यन्त लाभदायक है ।


Seb khane ke fayde


आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार सेब कषाय और मधुर रस प्रधान, शीतल तथा ग्राही होता है । भाव- प्रकाश में सेब को पाक में मधुर, शीतल, स्वादिष्ट, वात व पित्त के दोषों को नाश करने वाला, कफ वृद्धि कारक, पौष्टिक तथा वीर्यवर्द्ध क आदि गुणों वाला बताया है।


युनानी पद्धति के अनुसार सेब खट्टा और मीठा दो प्रकार का होता है। मीठा सेब गर्म और उत्तम गुण वाला होता है, जब कि खट्टा सेब ठंढा और रूखा होता है। सभी फलों की अपेक्षा हृदय और मस्तिष्क के लिए मीठा सेब ही उत्कृष्ट माना गया है । इसका सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और रक्त भी अधिक मात्रा में बनता है ।


 युनानी हकीमों का कहना है कि पित्त के रोगों में मीठे सेब की अपेक्षा खट्टा सेब अधिक गुणकारी एवं उपयोगी होता है, तथा यकृत की क्रिया को ठीक करने के लिए खट्टे सेब का सेवन बहुत उपयोगी है। 


सेब को अंग्रेजी में मांस फल (Flesh Fruit) भी कहते हैं। इससे स्पष्ट है कि सेब अद्भुत मांस- वर्द्धक फल है। - सेब दाँतों के लिए बहुत ही लाभदायक है। सेब का कैल्सियम दाँतों को मजबूत बनाता है। उससे दाँत चमकदार भी बनते है। भोजन करने के बाद 'सेब खाना स्वास्थ्य का बीमा कराना है। 



एक सेब रोज खाइए और वैद्य-डाक्टर को कभी घर न बुलाइए' यह बहुत प्रचलित कहावत ही इस बात को भली भाँति सिद्ध करती है कि सेब स्वास्थ्य के लिए कितना अधिक उपयोगी है । इस फल में पेट को साफ रखने का अद्भुत गुण है। यदि खाली पेट दो सेब प्रति दिन खाए जायँ तो कभी कब्ज की शिकायत नहीं होती । बच्चों की पेचिश में भी सेब बड़ा हितकारी सिद्ध होता है । 



अमेरिका के आहार विशेषज्ञ डाक्टर जे० एच० केलाग ने एक जगह लिखा है कि सेब के रस में पेट और आँतों के हानिकर कीटाणुओं को नष्ट करने का अद्भुत गुण है, तथा पेट के बायुविकार में यह फल बड़ा गुणदायक सिद्ध होता है । उन्होंने यह भी लिखा है कि सेब का रस अंगूर के रस की अपेक्षा कहीं अधिक हितकर और शक्ति प्रदान करने वाला होता है ।


गठिया तथा वात रोगों के लिए भी सेब बड़ा- हितकर है, विशेष रूप से उस स्थिति में जबकि कष्ट युरिक एसिड' के कुप्रभाव के कारण हुआ हो । ज्वर की तीव्रता को शान्त करने के लिए भी सेब का उप- योग होता है । 


सेब खाते समय लोग अक्सर उसका ऊपरी छिल्का छीलकर फेंक देते हैं, लेकिन उसको छिल्के में तथा छिल्के के ठीक नीचे के गूदे में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। अतः छिल्का सहित सेंब खाने वालों को मसूढ़ों से खून निकलने का रोग कभी नहीं होता है ।


 केवल विटामिन सी ही नहीं, सेब के गूदे की अपेक्षा सेब के छिलके में विटामिन ए भी ५ गुना अधिक होता है । इसलिए सेब के छिल्के को छील फेंकना बुद्धिमानी नहीं है, अपितु सेब के खाने का पूरा पूरा लाभ उठाने के लिए उसे छिल्के सहित खाना चाहिए ।


 फॉस्फोरस और लौह तत्त्व प्रधान होने के कारण सेब मस्तिष्क और शरीर की मांसपेशियों में शक्ति का संचार कर उन्हें सुदृढ़ बनाता है। कच्चे सेब की सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अत्यन्त गुणकारी होती है ।


सेव से बनने वाले पदार्थ


सेब की जेल, सेब का जैम, सेब का हलवा,सेब का पेय,सेब का गुलकंद।


Seb khane ke fayde


Apple Benefits in Hindi


1.दिल व दिमाग की कमजोरी)-हृदय और मस्तिष्क के कमजोर होने की दशा में सेब का ताजा फल रोज नियमित रूप से खाने से विशेष लाभ होता है ।


मीठे सेब लेकर और छीलकर उनकी फाँकें (slice)कर डालें । तत्पश्चात् उन्हें किसी शीशे या चीनी मिट्टी की प्लेट में रखकर रात भर किसी ऐसे स्थान पर रखें जहाँ चन्द्रमा की किरणें और ओस पड़ती हो । प्रात:काल नाश्ते में उन फाँकों को लें कम से कम एक या डेढ़ मास तक । सेब का मुरब्बा भी इसमें उपकारी होता है ।


2.नेत्र पीड़ा) -सेब को सिल पर पीसकर और जब चौथाई पानी शेष रहे, तब उसमें आठवाँ भाग कागजी नींबू का रस मिलाकर देशी चीनी या मिश्री के साथ चाशनी बना ले और २ तोले की मात्रा से उसकी पुल्टिस बनाकर दुखती आँख पर बाँधने से आँखों की पीड़ा शान्त हो जाती है।


3.बच्चों की पुरानी पेचिश)-एक मीठे व पके सेब को पकाकर तथा उसे मसलकर हलुआ-जैसा बना ले और उसे रोगी बच्चे को खिलावें। ऐसा करने से ४८ घंटों में ही पेचिश का कष्ट दूर हो जाता है और इस हलुए को कुछ दिनों तक सेवन करने से पेचिश की बीमारी जड़-मूल से चली जाती है।  


4.जब क्रोध अधिक आता हो)-तो नियमित रूप से रोज प्रातःकाल एक या दो ताजे सेब खायँ, धीरे-धीरे क्रोध का आना समाप्त हो जावेगा।


5.मलेरिया व टाइफायड)-सेब का विधिवत् सेवन मलेरिया व टाइफायड में लाभकारी सिद्ध होता है।


6.चित्त-भ्रम व घबराहट)-शरीर की जीवनी शक्ति के कमजोर हो जाने से भय, भ्रम और घबराहट आदि उपद्रव प्रकाश में आते हैं । इन अवस्थाओं में सेब के शरबत का सेवन रामबाण औषधि का काम करता है।


सेब का शरबत बनाने की विधि :- मीठे सेबों का बीज व छिल्का दूर करके उन्हें थोड़ा कूट लें, फिर गुनगुने पानी के साथ उबालें। जब चौथाई पानी शेष रहे, तब उसमें आठवाँ भाग कागजी नींबू का रस मिलाकर देशी चीनी या मिश्री के साथ चाशनी बना लें और २ तोले की मात्रा से सेवन करें ।


7.बेहोशी)-मीठे सेब का रस निचोड़ कर और उसे धीमी आँच पर थोड़ा गरम करके रोगी को पिलाने से बेहोशी में लाभ होता है ।


8.अधिक प्यास लगना)-एक सेब को टुकड़े टुकड़े करके और कुचल कर उसका रस निकाल लें; उसमें ३ तोला के लगभग पानी मिलावें और रोगी को पिला दें, उसका तृषाधिक्य (अधिक प्यास लगने का) रोग शान्त हो जावेगा ।


9.खाँसी)-पके हुए सेब के रस में मिश्री मिलाकर पीने से सूखी खाँसी मिटती है ।


10.आँतों के कीड़े)-भुना हुआ सेब सेवन करने से आँतों के कीड़े मर जाते हैं ।