Brinjal in Hindi


Brinjal in Hindi


इस पोस्ट में हम Brinjal in hindi,Baingan ke fayde,Baingan Bharat,Began, Baingan bhaja,Baingan के बारे में बात करेंगे।


परवल की तरह बैंगन भी भारतवर्ष की एक सुप्रसिद्ध तरकारी है, जो यहाँ सर्वत्र बोयी और खायी जाती है। बैंगन का फल २ से ९ इंच तक लम्बा होता है, और यह गोल भी होता है। बैंगन, श्वेत, श्वेतहरिताभ, बैंगनी रंग का काला, तथा रक्ताभ नीला आदि कई रंगों का होता है। बैंगन के पेड़ में फूल व फल वर्ष में कई बार लगते रहते हैं।संस्कृत में बैंगन को वृन्ताक, वार्ताक, भण्टाक;हिन्दी में बैंगन, बेगुन. भंटा, भाँटा, बताऊँ; मराठी में बाँगी, बांगे; गुजराती में बैंगनी, रीगंणा; बँगला में, बेगुन, बोंग, वातकि; अंग्रेजी में बिन्जल, तथा एगप्लांट;और लैटिन में सोलनम मेलॉन्जीना (Solanum Melo-ngena) कहते हैं।


                    रासायनिक विश्लेषण


  जल ८८ से ९१.५ प्रतिशत, खनिज पदार्थ ०.५. प्रतिशत, प्रोटीन १.३ प्रतिशत, वसा ०.३ प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट ६.४ प्रतिशत, कैल्सियम ०.०२ प्रतिशत, फॉस्फोरस ०.०६ प्रतिशत, लोहा १.३ मिलीग्राम प्रति १०० ग्राम, विटामिन ए ५ इं० यू० प्रति १०० ग्राम, विटामिन बी, १५ इं० यू० प्रति १०० ग्राम, विटामिन बी, काफी तथा विटामिन सी २३ मिलीग्राम प्रति १०० ग्राम पाया जाता है।


Began


                       Baingan ke fayde


  1.बवासीर)-मुर्गी के . अण्डे के आकार के सफेद बैंगन का भर्ता खाने से बवासीर ठीक हो जाती है। सायटिका-बैंगन को रेंडी के तेल में तलकर उसमें 'अन्दाज से हींग व नमक मिलाकर सेवन करने से सायटिका में लाभ होता है।



2.पेट फूलना)-गैस बनना-ताजे लम्बे व काले या बैंगनी रंग के बैंगन की तरकारी खाने से पेट के फूलने वगैस बनने की बीमारी दूर हो जाती है। यह तरकारी थोड़ी मात्रा में खानी चाहिए और उसे लहसुन : व हींग से छौंकना चाहिए।



  3.प्लीहा धूद्धि)-
इस रोग में बैंगन की तरकारी खाना गुणकारी होता है।



4.हब्बा-डब्बा)-इस रोग को पसली चलना भी कहते हैं। इसमें बैंगन को भूनकर और सज्जीखार मिलाकर पेट पर बांधने से तथा बहुत छोटे-छोटे बैंगनों की माला सी बनाकर रोगी बच्चे के गले में धारण कराने से लाभ होता है।



5 .अनिद्रा)-
सायंकाल को बैंगन के भरते में शहद या सफेद प्याज मिलाकर सेवन करने से रात में अच्छी निद्रा आती है।



6.सूजन)-बैंगन को पकाकर उसकी पुल्टिस बना कर वेदनायुक्त सूजन के स्थान पर बाँधने से लाभ होता है।



 7.नारू)-बैंगन को भूनकर और उसमें दही मिला कर नारू के स्थान पर बांधते रहने से ७ दिन के भीतर ही नारू का कीड़ा निकल जाता है।



8.वंत पीड़ा)-बैंगन के बीजों को आग में जलाकर उसके धुएं की धूनी नलिका द्वारा दर्द के स्थान पर देने से दर्द मिट जाता है।



9.) वजन कम करने में)
-बैंगन वजन कम करने में भी लाभकारी औषधि है यह आहार चर्बी को कम करता है और कैलोरी को जलाता है इसमें फाइबर होता है जिसको खाने से पेट भर जाता है और जल्दी भूख नहीं लगती ऐसे में वजन कम होता है।



10. कैंसर)-बैंगन में एक ऐसा तत्व होता है जो शरीर को कैंसर से लड़ने में सहायता प्रदान करता है ऐसे में अगर आप रोज प्रयोग करते हैं तो आप हमें कैंसर का खतरा बहुत नाममात्र रह जाता है यह खासकर पेट के कैंसर के लिए फायदेमंद होता है।


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Baingan ka bharta in Hindi



     बैंगन से बनने वाले कुछ खाद्य पदार्थ


बैंगन का आचार (Baingan ka achar)


अच्छे बैंगनों को लेकर १०-१५ मिनट तक उन्हें खौलते पानी में रखने के बाद निकाल ले। तत्पश्चात् उन्हें बीच से चीरकर नीचे का मसाला भर दें:- धनियाँ, मिर्च, मेथी, हल्दी, मँगरेला व राई हल्का भूनकर पीस ल । मिर्च, मँगरैला व राई को न भूनें । अब सरसों के तेल में मसालों को मिला लें व नमक भी अन्दाज से डाल दे । बेंगनों में मसाला भर चुकने के बाद उन्हें डोरे से बाँध दें और तेल में लपेट कर उन्हें एक दिन धूप में रखें । फिर किसी बर्तन में तेल भर कर उन्हें उसी में डाल दें और १०-१५ दिन पुन. धुप दिखावें | ऐसा करने से अँचार साल भर खराब न होगा।


बैंगन की तरकारी (Baingan ki Tarkari)

 
बैंगन की पाँच किस्में होती हैं-काला गोल, काला लम्बा या बारहमासी, गोलहरीभाँटिन जो सफेद चित्तीदार होती है, सफेद अण्डाकार जिसे बिलायती भाँटा भी कहते हैं, तथा लाल बैंगन जो टमाटर की तरह होता है । इन पांचों में बारहमासी बैंगन की तरकारी सबसे अच्छी बनती है। । तरकारी के लिए बैंगन नरम नरम और ताजे लेने चाहिए और धोने के बाद काटकर जीरा घी से छौंकना चाहिए । मसाला बिल्कुल नहीं डालना चाहिए अन्यथा उसका बादीपन और बढ़ जायगा। बैंगन की तरकारी पक जाने पर उसमें दही और धनिया की पत्ती मिलाकर खाना चाहिए।


बैंगन भाजा (Baingan bhaja recipe in hindi)


  बैंगन-भाजा बंगालियों का प्रिय खाद्य है। इसके बनाने की विधि अत्यन्त सरल है। पूरे बैंगन के तीन-चार गोल गोल टुकड़े करके और उनमें नमक हल्दी लगाकर उन्हें घी या शुद्ध सरसों के तेल में तल लेते हैं। यह भाजा खाने में अत्यन्त स्वादिष्ट होता है।



बैंगन का भर्ता (Baingan ka bharta in Hindi)


 
बैगन को कण्डे की आग में जो.. बहुत तेज न हो भून कर और ऊपर का छिल्का हटा- कर उसमें सेंधा नमक व कालीमिर्च मिलाकर भर्ता तैयार करें। स्वस्थ मनुष्य इसमें हरी या लाल मिर्च व शुद्ध सरसों का तेल भी डाल सकते हैं । ऐसा करने से बैंगन का भर्ता अधिक स्वादिष्ट हो जाता है । भर्ते को घी या तेल में तलकर खाना ठीक नहीं ।



बैंगन की उत्पत्ति भारत से हुई है और यह पूरे विश्व भर में पाया जाता है बैंगन की वैसे तो कई किस्में होती हैं जैसे गोल और लंबे बैंगन लोग ज्यादातर लंबे बैंगन को खाना पसंद करते हैं वैसे तो इसके कई औषधीय गुण हैं ,बढ़ती उम्र के साथ हमारे चेहरे पर झुरिया आ जाती हैं जो व्यक्ति हफ्ते में  दो बार इसका सेवन करता है उसके चेहरे पर झुरिया नहीं आती ।यह हमारे मस्तिक के लिए भी फायदेमंद होता है और हमारे दि ल के लिए भी ।



तो यह थी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी , अब हम बात करते हैं बैंगन किसे किसे नहीं खाना चाहिए, भूख से पीड़ित व्यक्ति को बैंगन नहीं खाना चाहिए, अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति को बैंगन नहीं खाना चाहिए, बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को बैंगन नहीं खाना चाहिए, गर्भवती महिला  को बैंगन नहीं खाना चाहिए, त्वचा रोग और एलर्जी में भी बैंगन नहीं खाना चाहिए, अगर आपको एसिडिटी है तो आप बैंगन की तरफ नही देखना चाहिए।


 
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