Nimbu ke fayde|Benefits of lemon in Hindi, Nibu.

Nimbu ke fayde

Nimbu ke fayde


इस पोस्ट में हम Nimbu ke fayde, Benefits of lemon in hindi,Nibu,Nimbu me konsa vitamin hota hai के बारे में बात करेंगे।

नींबू के गुण-धर्म नींबू संसार के सर्वश्रेष्ठ फलों में से है। यह संसार के प्रायःप्रत्येक भूभाग,विशेषतःउष्ण-प्रधान देशों में पाया जाता है। पहले रोमन और ग्रीक जाति के लोग इससे नितान्त अपरिचित थे। यूरोपवालों को इसका पता सर्वप्रथम क्रुसेड (धर्मयुद्ध) के समय में लगा। कालान्तर में उन्होंने भी इसके गुणों की छान- बीन की और इसे अत्यंत उपयोगी फल पाया। 


नींबू की कई किस्में होती हैं, और थोड़े बहुत अन्तर से वे प्रायः सभी गुणप्रद होती हैं । नारंगी का तो एक विशिष्ट स्थान है । परन्तु दवा के काम में बिजौरा, जम्भीरी और कागजी नींबू ही विशेष रूप से व्यवहार में लाये जाते हैं। इस पुस्तक में हम विशेष रूप से कागजी नींबू के ही गुणों का उल्लेख करेंगे। केवल नींबू शब्द से प्रायः कागजी नींबू का ही बोध होता है।


 
आयुर्वेदिक ग्रन्थों में नींबू का बड़ा गुणगान किया गया है।
नींबू अम्ल, वातनाशक, हल्का, दीपन, पाचन, कीड़ों. को नाश करनेवाला, तीक्ष्ण, उदररोगों को दूर करनेवाला, श्रमनाशक, वात-पित्त-कफ और शू ल में हितकर है। कष्टसाध्य अरुचि का निवारक और रुचि को बढ़ानेवाला है। अनेक त्रिदोषजन्य रोग, तत्काल के ज्वर, मन्दाग्नि, मुख आदि से पानी गिरना, कोष्ठबद्धता, बद्धगुद और हैजा में लाभदायक है।


 
पाश्चात्य विद्वानों को नींबू के गुणों का पता बहुत बाद में चला। अनेक प्रयोगों के पश्चात् उन्होंने भी इसकी प्रशंसा मुक्तकण्ठ से की है। प्रोफेसर प्रो फान मूलर साहब का, जो आजकल स्टाकहोम विद्यालय में प्रोफेसर हैं और जो विटामिन नामक प्रमुख खाद्य- तत्त्व के अनुसन्धानकर्ता हैं तथा जिन्हें रसायनशास्त्र में 'नोबेल प्राइज' का इनाम मिल चुका है, नींबू के विषय में मत है कि नींबू में निमोनिया के कीटाणु मारने का गुण विशेषरूप से पाया जाता है। सर्दी और इन्फलुएंजा में इसके सेवन से आशातीत लाभ होता है।


 
डाक्टर विल्सन का कथन हैं कि नींबू में एक प्रबल कीटाणुनाशक शक्ति (Powerful antisePtic) है, जो अन्य फलों में बहुत कम पाई जाती है। हरी तरकारियों से प्राप्त होने वाले विटामिन-रहित खाद्य से उत्पन्न रक्त-विकार रोग को रोकने अथवा दूर करने के लिए नींबू के रस का प्रयोग अत्यन्त लाभदायक है। इसी लिए लम्बी यात्रा करनेवाले जहाजों में नींबू का रस पर्याप्त मात्रा में रख लिया जाता है।


Nimbu me konsa vitamin hota hai


 
नींबू में विटामिन ए, बी और सी पाये जाते हैं- विटामिन ए एक भाग, विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग । विटामिन ए के द्वारा शरीर की पोषणक्रिया और वृद्धि होती है। विटामिन ए के अभाव में शरीर की वृद्धि रुक जाती है और संक्रामक रोगों से सुरक्षित रहने की शक्ति घट जाती है। तथा नेत्रविकार उत्पन्न हो जाते हैं। जोड़ों में रूक्षता, शूल तथा अस्थिरोग और गठिया रोग हो जाता है । दाँत कमजोर हो जाते हैं, मसूढे फूल जाते हैं और पायरिया रोग हो जाता है । मुख से दुर्गन्ध आने लगती है तथा शरीर के आन्तरिक अवयवों में गड़बड़ी पैदा हो जाती है । नींबू में विटामिन ए (एक भाग) पाया जाता है।


Nibu


 
विटामिन बी का कार्य शरीर के पोषणकार्य में सहायता देना है। जीवन को स्थिर और शरीर को आरोग्य बनाये रखने के लिये विटामिन बी की बड़ी आवश्यकता है। विटामिन बी के अभाव में पाचनशक्ति घट जाती है। मंदाग्नि, अजीर्ण, मरोड़, मलावरोध आदि व्याधियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। विटामिन बी के नितांत अभाव में बेरीबेरी रोग हो जाता है। विटामिन बी से ज्ञानतन्तुओं को शक्ति मिलती है। बच्चों के आहार में विटामिन बी न रहने से उनकी वृद्धि रुक जाती है। नींबू में विटामिन बी (दो भाग) पाया जाता है।



विटामिन सी भी पाचनक्रिया में सहायता देता है। इसकी कमी होने पर पेट और आँतों में छाले पड़ जाते हैं, रक्तरोग हो जाते हैं, जोड़ों में कठोरता आ जाती है, मुख से दुर्गन्ध आने लगती है और दाँतों में पायरिया रोग हो जाता है। शरीर के भीतरी यंत्रों में खराबी पैदा हो जाती है। शरीर दुर्बल और बेकार होता जाता है। नींबू में विटामिन सी तीन भाग पाया जाता है।


 
नींबू में जल ६२.५ प्रतिशत, प्रोटीन ०.७ प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट ५.९ प्रतिशत, वसा ०.५ प्रतिशत और खनिज-लवण ०.४ प्रतिशत पाये जाते हैं। प्रति पौंड १८० केलोरी उष्णता-उत्पादक शक्ति होती है। इसके सिवा नींबू में कैल्सियम, पोटंशियम, मैंग्नीशियम, क्लो- रीन इत्यादि प्रमुख खनिजतत्त्व प्रचुर परिमाण में पाये जाते हैं ।


 कैल्शियम (चूना) की शरीर में कमी होने पर हड्डियाँ दुर्बल और पतली हो जाती हैं, रक्त में गर्मी नहीं रह जाती और शरीर की पुष्टि का कार्य रुक जाता है। पोटैशियम की कमी होने पर यकृत ( लिवर) में गड़बड़ी और मलावरोध पैदा हो जाता है तथा जख्म देर से अच्छे होते हैं । मँग्नीशियम की कमी होने पर स्नायु में खराबी, अस्थिरता तथा खून में खटाई की मात्रा बढ़ जाती है।


 क्लोरीन (Chlorinc) की कमी से शरीर में वहुत ज्यादा विकार इकट्ठा हो जाते हैं। नींबू में उपर्युक्त खनिज तत्त्व खूब पाये जाते हैं । निस्सन्देह नींबू बहुत लाभप्रद वस्तु है। भोजनालय में इसका उपयोग सभी फलों से अधिक होता है । भोजन की वस्तुओं में इसका रस मिला देने से न केवल उनका स्वाद ही बढ़ जाता है; वरन् भोजन पाचक सुगन्धियुक्त और गुणप्रद हो जाता है ।


 
नींबू में सबसे बड़ी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसकी खटाई पेट में जाकर खटाई का असर नहीं पैदा करती; इसलिए इसकी गिनती खटाई में न करनी चाहिए ।


 
नींबू में कार्बोज भी खूब पाया जाता है । देह में बल उत्पन्न करने और शरीर की गर्मी को स्थिर रखने के लिए कार्बोज की बड़ी आवश्यकता होती है । ऐसी वस्तुओं की गणना अग्नितत्त्व में की जाती है । इससे क्षुधा, तृष्णा, तन्द्रा, निद्रा और कामेच्छा बढ़ती है । नींबू में एसिड भी पाया जाता है। एसिड पाचनशक्ति को बढ़ाता है।


Benefits of lemon in Hindi



             Benefits of lemon in Hindi 



1. मौसमी कफज्वर या इन्फ्लुएंजा (Influenza) में-
(१) हल्का पसीना लाने, गुर्दो (kidneys ) को सुधारने, बुखार की बेचैनी और अनिद्रा को दूर करने के लिये यह प्रयोग काम में लावें-
(i) नींबू का रस और जल समान भाग में ४ औंस ।


(ii) पोटैंशियम बाइकारबोनेट १ ड्रामऔर जल ३ औंस । इन दोनों का मिश्रण अलग-अलग बनाकर रख । बड़े चम्मच की मात्रा में दोनों से लेकर एक में मिला- कर फदफदाते-फदफदाते पी जायँ । दिन में कई बार यह प्रयोग करें।

 
(२) बिना किसी दवा के संयोग के ही केवल नींबू का रस, रोगी की रुचि के अनुसार गर्म या ठंढे पानी में घंटे-घंटे भर में देने से इन्फ्लुएंजा में यथेष्ट लाभ होता है ।

 
2. बाल बढ़ाने के लिए- नींबू के रस में बरगद की जटा पीसकर मलने के बाद बालों को धोकर नारियल का तेल लगाने से बालों का गिरना रुककर बाल लम्बे हो जाते हैं ।

 
3. सर में जू पड़ने पर- लहसुन को पीसकर उसका रस निकालकर नींबू के रस में मिलाकर बालों में मलने से सर की जूं-लीख का नाश होता है ।

 
4. पथरी में-
नींबू और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से पथरी में लाभ होता है ।

 
5. मिरगी में-
बिजौरा नींबू और मेउढ़ी के पत्तों के रस की नास । दौरे के समय नींबू का रस २ तोला, आक के पत्तों का रस २ तोला-दोनों को मिलाकर नाक में पिच- कारी देने से मिरगी सदैव के लिए दूर हो जाती है ।

 
6. कान के दर्द में-
बिजौरा नींबू,आम और अदरक का रस गरम कर, गुनगुना ही कान में डालें ।


7. कान के बहने पर- (१) बिजौरा नींबू (बिजौरान मिलने पर कागजी नींबू) के रस में सज्जीखार मिलाकर कान में डालें ।

 
(२) समुद्रफेन(  समुद्र का झाग) बारीक पीसंकर रख लें । कान को रुई से साफ करके पिसा हुआ समुद्रफेन एक रत्ती डालकर ऊपर से ४ बूंद नींबू का रस डालें । तीन-चार दिन के प्रयोग से लाभ होगा ।

 
(३) कपड़ा धोनेवाला सोडा या कौड़ी जलाकर उसका चूर्ण कान में डालकर ऊपर से नींबू का रस डालें ।


8. मुँह के मुँहासों और चेहरे के दागों पर- (१) रात को नींबू के टुकड़े से चेहरे को रगड़े या नींबू का रस चेहरे पर लेप करके सूखने दे । प्रात:- काल किसी अच्छे भारतीय स्निग्ध साबुन और गुनगुने पानी से चेहरे को धो डालें । इसके प्रयोग से मुँहासे दूर होकर चेहरे की रंगत निखर आती है ।

 
(२) सुबह-शाम एक नींबु का रस एक गिलास ताजे पानी के साथ पीने से अन्दर का मल धुलकर साफ हो जाता है और त्वचा की रंगत निखर आती है ।

 
(३) दूध और नींबू का रस मिलाकर देर तक चेहरे पर लगा रहने दें । फिर धो डालें । इससे कील, मुँहासे इत्यादि दूर होकर त्वचा साफ और कान्तिवान् हो जाती है।

 
9. झाई पर- कागजी नींबू के रस में खड़ी मसूर या चीनियाँ के फूल पीसकर चेहरे पर उबटन की भाँति मलने से झाँई दूर हो जाती है ।

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