Wood Apple In Hindi,Bael Fruit,Bael khane ke fayde.


Wood apple in hindi

Wood apple in hindi

दोस्तो इस पोसट में हम wood apple in hindi,Bael Fruit,Bael,Bael khane ke fayde के बारे में बात करेंगे।  यह एक भारतीय फल है। भारत में bael fruit को बड़े ही चाव से खाते है। इसे wood apple कहां जाता है। भारत में ज्यादातर गर्मियों में लोग बेल के जूस का इस्तेमाल करते हैं। पोषक तत्त्वों का अक्षय कोष माना गया है। इसके अणु-अणु में सत्व निहित है। 


 फल के गूर्द में म्युसिलेज, पेकूदी, शर्करा, टेनिन, उड़नशील तेल, तिक्त सत्त्व, निर्यास एवं भस्म प्रचूर मात्रा में होते हैं। फल का अत्यत महत्त्वपूर्ण खाद्य घटक है, जो पके फल में 16.2 पाया जाता है।


 इसके अतिरिक्त इसमें प्रोटीन, वसा एवं विटामिन-सी विशेष रूप-से पाया जाता है। इसमें जो टेनिन का तत्त्व होता है, उसके कारण यह फल विशेष उपयोगी हो जाता है। इसके ताजा पत्रों से एक विशिष्ट गंधयुक्त तेल निकाला जाता है।


 आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति ने यह साबित कर दिया है कि बेल फल के गूदे, पत्र एवं मूल में जो रासायनिक तत्त्व पाए जाते हैं, उनका विशेष प्रभाव आंत्र व रक्तवाही-संस्थान पर पड़ता है । 


बेल फल का उतना लाभ अतिसार में नहीं होता, जितना कि चिरकालीन आमातिसार और रक्तातिसार में होता है । बेल में जो रसदार पदार्थ होता है, उसके प्रयोग से ही आंत्र में स्निग्धता आती है एवं उसकी गति नियमित होकर मलावरोध के द्वारा रस का शोषण रक्त में होता है और बंधा हुआ मल आने लगता है।


अतिसार : | बेल का मुरब्बा सर्व प्रकार से आमाशय-संबंधित विकृतियों पर अच्छा प्रभाव डालता है तथा अतिसार का यह उत्तम उपाय है।


काली खांसी : बेल का शर्बत बच्चों की कुकर खांसी में लाभ करता है। यह संग्रहणी-विकार में भी उपयोगी है । इसका सेवन ग्रीष्मकाल में करना चाहिए।


मसूड़े के रोग : बेल का पचास ग्राम शर्बत दूध के साथ धीरे-धीरे घूंट भर पीने से मसूड़ों का असाध्य रोग भी दूर हो जाता है।


पेचिश : कच्चे बेल फल को आग में भूनें और ठंडा होने पर रख लें। इसके दो चम्मच गूदे को एक गिलास पानी में रात को भिगो दें तथा सुबह मसलकर और छान कर पी लें। इससे पेचिश का रोग ठीक होता है। अथवा एक तोला गूदे को एक तोला गुड़ में मिलाकर प्रातःसायं सेवन करने से पुरानी पेचिश भी ठीक हो जाती है।


आंखों के रोग : पकी बेल के गूदे में योड़ी मिश्री मिलाकर सेवन करने सेआंखों के रोग ठीक हो जाते हैं। पकी बेल का शर्बत यदि प्रतिदिन शाम को एक गिलास पिया जाए, तो आंखों की शक्ति बढ़ती है और अनेक रोग नष्ट हो जाते हैं।


बहुमूत्र : इस रोग से मुक्ति हेतु एक चम्मच पकी बेल का फल एक चम्मच शहद में मिलाकर खाने से लाभ होगा। शिशुओं के दस्त : सूखे बेल फल को पानी में घिसकर दिन में दो-तीन बार शिशुओं को चटाएं। इससे शिशुओं के पानी जैसे बहते दस्त भी रुक जाते हैं। कर्णरोग : बेल के गूदे को तिल के तेल में अच्छी तरफ पकाकर और छानकर दो बूंद की मात्रा में सुबह और शाम को कानों में डालें। संग्रहणी : सूखे बेल फल का चूर्ण बनाएं। एक ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार, छाछ या ताजा पानी से लेने से संग्रहणी में लाभ होता है।


बहरापन : आपको बेल के कोमल पत्र लेने है और किसी निरोगी गाय के मूत्र में पीसकर तथा चार गुना तिल का तेल तथा 16 गुना बकरी का दूध मिला लेना है और मंद अग्नि द्वारा तेल सिद्ध कर रख लेना है। इसे हर रोज कानों में डालने से बहरापन, सनसनाहट (कर्णनाद), कानों की खुश्की, खुजली आदि दूर होती है। 


हैजा व वमन :आपको आम की मींगी और बेलगिरी लेनी है और दोनों को 10-10 ग्राम लेकर कूट पीसकर 500 ग्राम जल में पकायें । जब 100 ग्राम शेष रह जाए तो इस में शहद और मिश्री मिलाकर 5 से 20 ग्राम तक आवश्यकतानुसार पिलाना है, इससे वमन युक्त अतिसार में भी लाभ होता है।


 विसूचिका : बेलगिरी और गिलोय 1-4 ग्राम कूटकर आधा किलो जल में पकायें। 250 ग्राम शेष रहने पर छानकर थोड़ा-थोड़ा पिलायें। यदि हैजा तीव्र हो तो इस क्वाथ में जायफल, कपूर और छुहारा मिलाकर क्वाथ करें तथा बार-बार थोड़ा-थोड़ा पिलायें। 


Bael Fruit


मधुमेह : 1.अगर आप बेल के ताजे पत्तों को समभाग 10 ग्राम से 20 ग्राम तक पीसकर उसमें 5-7 काली मिर्च के दाने मिलाकर सुबह खाली पेट पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ प्राप्त होता है।


2.प्रतिदिन प्रातःकाल 10 ग्राम पत्र स्वरस का सेवन भी गुणकारी है।


 3.बेलपत्र, हल्दी, गिलोय, हरड़, बहेड़ा और आंवला, 6-6 ग्राम, सबको कूटकर 250 ग्राम जल में रात्रि को कांच व मिट्टी के बर्तन में भिगो दे प्रातःकाल खूब मसल, छानकर, आधी मात्रा प्रातः-सायं 2-3 माह तक सेवन करने से यह रोग नष्ट हो जाता है। 


4.बेल पत्र और नीम पत्र 10- 10 नग तथा तुलरी पत्र 5 नग, इनको पीसकर गोली बनाकर प्रातः नित्य जल के साथ सेवन करें। 


पांडु (कामला) : 1.कामला व पांडुरोग में कोमल पत्रों के 10 से 30 ग्राम तक रस में आधा ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रातः- सायं सेवन कराने से लाभ होता है ।


2. शोथ में पत्र रस को गरम कर लेप दें या पत्रों का क्वाथ कर बफारा देवें ।


प्रदर : बेलपत्र रस को दोनों समय शहद साथ सेवन कराने से लाभ होता है। बहुमूत्र : बेलगिरी 10 ग्राम, सोठ 5 ग्राम को, जौकूट कर 400 ग्राम जल में अष्टमांश क्वाथ सिद्ध कर सुबह-शाम सेवन कराते रहने से 5 दिन में पूर्ण लाभ होता है । 


कमजोरी : 1. अगर आप बेलगिरी के चूर्ण को मिश्री मिले हुए दूध के साथ लेते हो तो रक्ताल्पता, शारीरिक दुर्बलता तथा वीर्य की कमजोरी दूर होती है।


 2. धातु रोग में 3 ग्राम पत्र चूर्ण को थोड़े से शहद मे मिलाकर सुबह शाम नियमित चाटने से धातु रोग ठीक होता है।


 3. बेलगिरी, असगंध और मिश्री समभाग चूर्ण कर उसमें चौथाई भाग उत्तम केशर का चूरा मिलाकर, 4 ग्राम तक प्रातः- सायं खाकर ऊपर गरम दूध पियें।


4. सुखाये हुए पक्व फलों के गूदे के महीन चूर्ण का थोड़ी मात्रा में नित्य प्रात:- सायं सेवन करने से कमजोरी दूर होती है ।


 

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