Akhrot| walnut in Hindi,Akhrot ke Fayde.

Akhrot



 Akhrot


Akhrot-अखरोट सूखे मेवों में बादाम के बाद अखरोट श्रेष्ठ गिना जाता है । अखरोट का पेड़ बहुत विशाल होता है।इसके गिरी खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। अखरोट की बनावट मनुष्य के भेजे से मिलती जुलती है जो इंगित करता है कि अखरोट मनुष्य के मस्तिष्क के लिये उपकारी है। 



अखरोट दो प्रकार का होता है एक को अखरोट और दूसरे को रेखाफल  नाम से जाना जाता है । 


Walnut in Hindi-walnut को हिन्दी में अखरोट,

Akhrot in English-अंग्रेजी में 'वालनट' (walnut) तथा लैटिन में जुगलांस-रेजिया (Juglans regia) कहते हैं । 


अखरोट का पेड़ अपने आप भी उगता व फलता है और खेत में बोया भी जाता है । जो अपने आप उगता है ,वह जंगली किस्म का होता है और उसका पेड़ बहुत ऊंचा होता है, और फल का छिलका भी असाधारण रूप से मोटा होता है और सख्त भी।


 जो अखरोट का पेड़ बोया हुआ होता है वह छोटा होता है और उसके फल का छिलका पतला एवं कागजी होता है । इसलिये ऐसे अखरोट को कागजी बादाम की तरह कागजी अखरोट कहते हैं । 


अखरोट हिमालय की तराई वाले प्रान्तों में कश्मीर से मनीपुर तक, तिब्बत की पहाड़ियों, अफगानिस्तान, तथा चीन व ईरान में अधिक होता है। 


अखरोट के बोने के लगभग ३० या ४० वर्ष बाद पेड़ में फल लगते हैं। फल, बहेड़े के समान गोलगोल होते हैं। कच्ची अवस्था में फल के भीतर दूध सा चिकना द्रव्य होता है जो पकने पर ठोस हो जाता है। अखरोट जब कच्ची अवस्था में होता है तो उसका लोग अचार बनाते हैं जो बहुत स्वादिष्ट होता है। 


जब अखरोट पूरे तौर से पक कर तय्यार हो जाता है तो सूखे मेवे की भांति खाया जाता है और उसका तेल भी निकाला जाता है। 


Walnut oil- अखरोट का तेल


Akhrot-अखरोट से तेल निकालने के लिये पहले अखरोट के फलों को वृक्ष से तोड़ कर किसी सुरक्षित स्थान पर ३ मास तक रख छोड़ते हैं। पी३ मास बाद जब फलों के अन्दर का दूध सूख कर गिरी का रूप ले लेता है तो उनको महीन कूट या पीसकर और कपड़े की थैली में भरकर और मशीन में दबाकर तेल निकाल लिया जाता है, यह तेल पतला और स्वादिष्ट होता है। उसके बाद अखरोट की खली बच रहती है उसे पानी में डालकर और उबाल कर पुनः निकाला जाता है। यह तेल हरे रंग का होता है और सुस्वादु नहीं होता। 


Akhrot-अखरोट में जल ४.५ प्रतिशत, प्रोटीन १५.६ प्रतिशत, खनिज पदार्थ १.८ प्रतिशत, वसा ६४.५ प्रति- शत,कार्बोहाइड्रेट ११.०० प्रतिशत, कैल्सियम ०.१० प्रतिशत, फॉस्फोरस ०.३८ प्रतिशत, लोहा ४.८ मिलीग्राम प्रतिशत, तथा विटामिन ए और बी भी होता है। 


कहा जाता है कि अखरोट की उत्पत्ति ईरान से हुई है, ईरान से शुरू होकर इसकी खेती इटली , स्पेन, फ्रांस जर्मनी से होते हुए भारत में होने लगी। भारत के हिमाचल प्रदेश ,उत्तराखंड , कश्मीर के कुपवाड़ा, उड़ी, , मद्रास और पुंछ आदि बर्फीली घाटियों और अरूणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी खेती सेब या एप्पल की खेती की तरह ही की जाती है। 


एक अखरोट का पोधा करीब 30 से 35 साल में समान्य रूप से फल देने लायक हो जाता है। 

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Akhrot ke Fayde-अखरोट के फ़ायदे


Akhrot ke Fayde-अखरोट के फ़ायदे


वृद्ध मनुष्यों का बलवर्द्धन)-एक तोला अखरोट की गिरियों को समभाग मुनक्का के साथ मिला कर प्रातःकाल रोज खाने से बूढ़े व्यक्तियों की शक्ति बढ़ती है।


बच्चों का कृमि)-रोग-रात को सोने से पहले बच्चे को एक अखरोट की गिरी खिलाकर गुनगुना गरम पानी पिला दीजिए। सुबह पेट के साधारण कीड़े मरकर पाखाने के साथ निकल जायंगे । अखरोट का तेल दूध में मिलाकर पिलाने से भी वही लाभ होता है। 


बच्चे का बिस्तर पर पेशाब करना)-अखरोट की गिरी १ भाग और किशमिश दो भाग एक में मिला- कर उचित मात्रा में कुछ दिन रोज रात को सोने से पहले खिलाएं, बच्चे की बिस्तर पर पेशाब करने की आदत छूट जायेगी। 


दाद)-प्रातःकाल बासी मुंह, अर्थात् बिना मुंह धोये अखरोट की गिरी को चबावें और उसे दाद पर लगावें। इस प्रयोग से दाद ठीक हो जाता है। 


एक्जीमा)-अखरोट की गिरी का तेल लगाने से एक्जीमा आराम हो जाता है । 


नासूर)-अखरोट की गिरी को पीस कर मोम व मीठे तेल में गलाकर नासूर पर लगाने से नासूर ठीक हो जाता है। 


कंठमाला)-अखरोट के पत्तों का काढ़ा पीने, तथा उसी से कंठमाला के फोड़ों को धोने से कंठमाला रोग ठीक हो जाता है। 


मुंह का लकवा)-अखरोट के तेल की मालिश मुंह पर करने से मुंह का लकवा ठीक हो जाता है । 


नारू की बीमारी)-अखरोट की खली को पानी में पीसकर गरम लेप करके पट्टी बांध देने से सूजन उतर जाती है और १५-२० दिन में नारू गल कर नष्ट हो हो जाता है। 


भेलावां का विष)-अखरोट का गूदा खाने से भेलावें का विष दूर हो जाता है। 


खाँसी)-(१) अखरोट की गिरी को भूनकर चबाने से खाँसी अच्छी हो जाती है ।

(२) छिलका सहित अखरोट को जलाकर उसका भस्म बनावें । फिर १ माशा यह भस्म और ५ माशा शुद्ध मधु एक में मिलाकर चाटें तो खाँसी में शीघ्र लाभ हो। 


हैजा)-अखरोट के तेल की मालिश करने से हैजा मैं लाभ होता है। 


मिरगी)-अखरोट गिरी को निर्गुण्डी के रस में पीसकर नेत्रों में आँजें और उसका नस्य भी दें । 


अफीम का विष)-अखरोट की गिरी को भरपेट खिलाने से अफीम का विष शान्त होता है।


कुत्ता के काटे का विष)-अखरोट का तेल १ तोले और गरम जल ५ तोले एक में मिलाकर ६-६ घंटे पर पिलाते रहें, ७ दिन में कुत्ते का विष शान्त हो जायगा । 


दिमाग की कमजोरी)-ढाई तोले से ५ तोले तक अखरोट की गिरी रोज भोजन के साथ सेवन करने से दिमाग सबल बनता है । 


सुजन)-अखरोट का तेल १ से ४ तोला तक १ पाव ताजे गोमूत्र में मिलाकर पीने से सर्वाङ्ग शोथ पर लाभकारी है ।


पेट में लाभ)-अखरोट में फाइबर और मैग्नीशियम होता है। अखरोट में मौजूद मैग्निशियम आपकी आंतों में पानी लाता है, जिससे आपका मल साइज में बड़ा हो सके और आंतों में आसानी से सरक सके। साथ ही साथ यह आपकी आंतों को रिलैक्स भी करता है। 


हड्डियों के लिए)-अखरोट का सेवन करने से हड्डियों में मजबूती आती है। जिन खाद्य पदार्थों में लिनोलेनिक एसिड पाया जाता है, वह हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद होते हैं और अखरोट भी इन्हीं खाद्य पदार्थों में से एक है।


अखरोट(Akhrot) में पाया जाने वाला कैल्शियम और विटामिन डी मजबूती के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है और यह हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है । अगर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में अखरोट का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।


  • नोट - आप सभी जानते होंगे कि अखरोट की तासीर गर्म होती है। गर्मियों में Akhrot का इस्तेमाल करते समय यह जान लेना जरूरी है कि यह आपको सूट करता है कि नहीं। अगर आप पर गर्म चीजों का सेवन करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो आप एक दिन छोड़कर अखरोट का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर इसका सर्दियों में इस्तेमाल कर सकते हैं।

एक युवा व्यक्ति को सिर्फ दिन भर में 30 ग्राम Akhrot का ही सेवन करना चाहिए क्योंकि हर किसी की आहार क्षमता एक जैसी नहीं होती। इसकी उचित मात्रा कितनी लेनी चाहिए इसके लिए आप किसी विशेषयज की सलाह ले सकते हैं।


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