Badam| Badam tree,Badam in English

 

Badam

Badam


Badam-संसार में बादाम(Almond) दो प्रकार का होता है-मीठा और कड़ुआ । कड़ुआ बादाम भोजन के काम में नहीं लाया जाता। मीठा बादाम भी दो प्रकार का होता है । जिस बादाम का आवरण विशेष कड़ा नहीं होता और केवल चुटकी से मसल देने पर ही अलग हो जाता है, उसे कागजी बादाम कहते हैं । कागजी बादाम प्रायः बागों में वैज्ञानिक ढंग से लगाये जाते हैं । कागजी बादाम की गिरी मोटी, बजनदार, विशेष स्निग्ध एवं स्वादिष्ट होती है । जिस बादाम का आवरण बहुत कड़ा होता है, और बिना किसी चीज से तोड़े आसानी से अलग नहीं होता उसे ठर्रा बादाम कहते हैं । 


ऐसे कड़े आवरण वाले बादामों के वृक्ष प्रायः जंगली या पहाड़ी होते हैं । इनके भीतर की गिरी पतली, हल्की और रूखी होती है । दोनों प्रकार के बादामों की गिरी के ऊपर जो लाल पतला छिलका होता है, उसका स्वाद कसैला और गुण कब्जकारक होता है । मीठे बादाम विशेषतः पश्चिमी एशिया के काबुल (अफगानिस्तान) व तुर्की आदि देशों में तथा यूरोप के कुछ देशों में अधिक पैदा होते हैं।


बादाम क कहा पाया जाता है।Badam kaha paya jata hai.


Badam tree- भारत के ठंढे प्रदेशों, जैसे कश्मीर, पंजाब व दक्षिण के पश्चिमी तट पर भी बादाम पैदा होते हैं, पर वे ठर्रा बादाम होते हैं। बादाम को संस्कृत में वाताद, वाताम, वातवैरी, नेत्रोपमफल, Almond in Hindi-हिन्दी में बदाम या बादाम, मराठी व गुजराती में बादाम, बंगला में बिलायती बादाम, Badam in English-अंग्रेजी में स्वीट आलमंड (sweet Almond) तथा लैटिन में पुनुस एमिगडेलस (Prunus Amygdalus) कहते हैं । 


badam me paye jane wale poshak tatva|बादाम में पाए जाने वाले पोषक तत्व



बादाम में तेल ५६ प्रतिशत, इमल्सिन (Emu- Isin ) ३ प्रतिशत, प्रोटोड्स ( Proteids ) २५ प्रतिशत, तथा राख ३ से ५ प्रतिशत होती है। राख में पोटे- शियम, कैल्सियम व मैग्नीशियम फास्फेट होते हैं । इसमें पोषक तत्त्व २४ भाग. चिकनाई ५४ भाग, कार्बोहाइड्रेट १० भाग, खनिज लवण ३.१/ ४ भाग, जल ७.१/४ भाग तथा विटामिन ए व बी थोड़े परिमाण में होते हैं। 



बादाम के गुण



 बादाम को सूखे मेवों का बादशाह कहा जाता है ,इसको कोन नहीं जानता। Aurvedic ग्रंथो में इसका खास स्थान है,अपने स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण यह सब मेवों से पुष्टिकर और गुणवान होता है।  एक Badam खाने से हमे एक अण्डे की ताकत मिलती है । बादाम में पाया जाने वाला प्रोटीन मांस व दाल की प्रोटीन से कहीं बढ़-चढ़ कर  गुणकारी होता है। अगर हम बादाम का लाल छिलका अलग करके और उसे पत्थर पर घिसकर पानी या दूध में मिलाकर सेवन करते है तो यह कभी कब्ज नहीं करता। 


Badam गर्मी व सर्दी में समशीतोष्ण होता है। यह शरीर में नया खून व वीर्य पैदा करता है और दूषित रक्त व वीर्य को शुद्ध करता है। 


निघण्टुरत्नाकर में पके हुये बादाम को मधुर, चिकना, पौष्टिक, शुक्रज, कफकारक तथा पित्त व वातपित्त का नाशक बताया है। सूखा हुआ बादाम मधुर, चिकना, धातुवर्द्धक, पौष्टिक, कफकारक एवं वातपित्त को दूर करने वाला होता है । 


कड़वे बादाम में तेल ४५ प्रतिशत, एमिगडेलिन (Amygdalin) ३ प्रतिशत (यह तत्त्व जल के संयोग से जहर बन जाता है), प्रोटीड २५ प्रतिशत, इमल्सिन शर्करा ३ प्रतिशत तथा राख ३ से ५ प्रतिशत होता है। 


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Badam

Badam khane ke Fayde


सूखी खांसी में)-बादाम की मींगी को भिगोकर उसका लाल छिलका अलग कर दें। फिर उसे सिल पर महीन पीसकर और उसमें शहद मिलाकर चटनी के रूप में दिन में कई बार लें, सूखी खांसी में लाभ होगा। 



बच्चों के सूखा रोग में )-लाल छिलका रहित ५-७ बादाम की मीगियों को सिल पर खूब महीन पीस लें या एक-एक मींगी को पत्थर पर घिस लें। उसके बाद उसमें थोड़ा पानी डालकर सफेद दूध-सा बना लें और रोज सुबह उस घोल को सूखा रोग से पीड़ित बच्चे को पिला दें तो कुछ ही दिनों में उसका रोग धीरे-धीरे चला जायगा। 



मस्तिष्क-दौर्बल्य)-उपर्युक्त बादाम के घोल में बाह्मी की ५-७ हरी पत्तियाँ पीस कर मिला देने के बाद उस घोल को सेवन करने से शरीर-दौर्बल्य और मस्तिष्क-दौर्बल्य, दोनों में लाभ होता है । बादाम का तेल दूध में मिलाकर सेवन करने से भी शरीर की एवं मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होती है । इस योग से पुरानी सिर-पीड़ा एवं कोष्ठबद्धता में भी लाभ होता है। 



सर्दीर्जन्य बहरापन)--सर्दी लग जाने के कारण यदि बहरापन-रोग हो जाय तो कान में बादाम के तेल की ५-७ बूदें डालने से बहरापन दूर हो जाता है। एक दिन एक कान में तथा दूसरे दिन दूसरे कान में तेल डालना चाहिए और तेल डालने के बाद कान के छिद्र को रुई से बंद कर देना चाहिए। 



घाव)-बैठने, लेटने अथवा घोड़े की सवारी आदि करने से रगड़ खाकर जो शरीर की चमड़ी पर घाव बन जाते हैं वे घाव बादाम के तेल के प्रयोग से शीघ्र भर जाते हैं। 



शरीर के काले दाग व छाजन)-- कड़वे बादाम की गिरी को पीसकर और बत्ती बनाकर योनि-मार्ग में रखने से रुका मासिक धर्म जारी हो जाता है। 



पागल कुत्ते का जहर)-यदि किसी को पागल कुत्ता काट ले तो कड़वे बादाम की गिरी को पीसकर उसे ४.३/२ माशे की मात्रा से देने से तथा काटे स्थान पर उसका लेप भी करने से पागल कुत्ते के काटे का असर नष्ट हो जाता है। 



पुराना सिरदर्द)-५-७ बादाम की गिरियों को शाम को पानी में भिगो दें । सुबह को उनके लाल छिलकों को हटा कर एक-एक को पत्थर पर चन्दन की तरह घिस ले और पानी मिला कर घोल बना पी जायँ । ७-८ दिन में ही पुराने से पुराना सिरदर्दे दूर हो जायगा। 




आधासीसी का दर्द)-गाय के आधा सेर दूध में एक तोला बादाम के छोटे-छोटे टुकड़े डालें और उसकी खीर बनाकर खायँ तो कुछ ही दिनों में आधासीसी के दर्द से निजात मिले ।



 अनिद्रा)-बादाम की गिरी १० नग व पोस्ते का दाना १ चम्मच-दोनों को पानी में भिगो दें पूरी रात भीगने दें। सुबह बादाम का लाल छिलका उतार कर दोनों को पीस कर और दूध व खांड़ मिलाकर पीवें, अनिद्रा-रोग दूर हो जावेगा । 



कर्णनाद)-कभी-कभी कान में सायं-सायँ की आवाज प्रतीत होती है। उस हालत में मीठे बादाम का तेल जरा गरम करके दो एक बूंद कान में डालने से लाभ होता है । 



सब प्रकार का सिरदर्द)-२ माशे मीठे बादाम के तेल के साथ १ माशा केसर मिला कर दिन में ३-४ बार सूंघने से हर प्रकार का सिर दद नष्ट हो जाता है । 



कमर का दर्द)-मीठे बादाम के तेल की मालिश करते रहने तथा साथ ही बादाम की गिरी को पीसकर दूध के साथ सेवन करते रहने से कमर का दर्द शीघ्र ठीक हो जाता है । 



पेशाब का रुकना)-मीठे बादाम के तेल में थोड़ी शक्कर मिलाकर पकाये हुए दूध का सेवन इसमें लाभ- प्रद होता है । 



मूत्राशय की पथरी)-रोज सुबह-शाम गाय के मीठे दूध में बादाम का ३ माशा तेल पीने से कुछ ही दिनों में मूत्राशय की पथरी टूट कर बाहर निकल जाती है। 



आँखों से पानी गिरना )- यदि आँखों से पानी गिरता हो तो मीठे बादाम की कुछ गिरियाँ ( ३ से ७ तक ) प्रति दिन चबाकर खाते रहने से कुछ दिनों में ही आँखों से पानी गिरना बंद हो जाता है । 



सब प्रकार की खांसी)-मीठे बादाम की गिरी, मुलैठी का महीन चूर्ण, और बीज निकाला हुआ मुनक्का, सबको बराबर-बराबर लेकर खरल में थोड़े जल के साथ खूब खरल करें। तत्पश्चात् चने के दाने के बराबर गोलियाँ बनाले । १-१ गोली दिन में ४ -५ बार मुख में रखकर उसका रस चूसते रहें । ऐसा करने से चाहे जिस प्रकार की खाँसी ही, अवश्य लाभ होगा । 



स्मरण शक्ति का ह्रास)-छिलके रहित मीठे बादाम की गिरी १ से आरम्भ कर रोज १-१ गिरी बढ़ाते हुये १० गिरी तक खूब चबाचबाकर प्रातःकाल खायें । फिर ११ वें दिन से १-१ गिरी रोज घटाते घटाते १ पर आ जायेँ ऐसा करने से मस्तिष्क शक्तिशाली बन जायगा जिससे स्मरण शक्ति भी बढ़ जायगी। 



पागलपन)-मीठें बादाम की १० गिरियों को जल में भिगोकर और उनका लाल छिलका उतार कर पीस लें । फिर उस पिट्ठी को गाय के २० तोला दूध में पकावें। पकाते समय उसमें २ तोला मिश्री और ३ नग छोटी इलायची का चूर्ण भी मिला दें । पक जाने पर उतार कर छान लें और ठंढा करके पीवें । ऐसा करने से मस्तिष्क की शक्ति बलवती होकर पागलपन मिट जायगा । 



सिर दर्द)-मीठे बादाम की गिरी को रात भर पानी में भिगोकर और प्रातःकाल उसका लाल छिलका दूर कर उसे पीसकर दूध में खीर की तरह पकावें और ठंढा कर उसमें शक्कर मिलाकर ३ दिन तक रोज खावें । साथ ही माथे पर बादाम की गिरी के साथ कपूर को दूध में घिसकर लेप करें तो सिर की पीड़ा में आराम मलेगा । 



पूरा शरीर पुष्ट और सबल हो)-मीठे बादाम की ३ नग गिरी लेकर रात को १० तोले गरम जल में भिगोकर प्रातःकाल उसका छिलका दूर कर ले और उसे खूब महीन पीसकर पिट्ठी बना लें या सिल पर थोड़े दूध के साथ घिसकर चंदन जैसी बना लें । फिर उसमें गुलकन्द १ से २ तोला तक तथा १-२ माशा असगंध का महीन चूर्ण मिला,मिश्रण को खाकर ऊपर से पकाया हुआ दूध १० से २० तोला तक पीवें । इस प्रयोग से शरीर सर्वाङ्ग पुष्ट होकर सबल होता है । 



स्वप्नदोष)-भिगोकर छिलका दूर की हुई मीठे बादाम की १ नग गिरी को ३ माशा मिश्री के साथ पीसकर उसमें उत्तम गिलोय का सत और ताजे मक्खन का निकाला हुआ घी ३-३ माशा तथा शहद ६ माशा, इन सबको एक साथ मिला रोज सुबह-शाम चाटने से स्वप्नदोष की बीमारी बहुत जल्द दूर हो जाती है । 

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