Beetroot Benefits in Hindi| Chukandar khane ke Fayde.

 

Beetroot Benefits in Hindi-चुकंदर खाने के फायदे

Beetroot Benefits in Hindi-चुकंदर खाने के फायदे


Beetroot in Hindi-चुकन्दर(chukandar), मूली, गाजर और शलजम की जाति की सब्जी है । युरोप और अमेरिका में इसका उत्पादन और खपत, दोनों अधिक होती है । वहाँ इससे चीनी बनाई जाती है और सब्जी के रूप में भी खायी जाती है । हमारे देश में यह जगह-जगह बोया जाता है ।


चुकन्दर के पौधे ,मूली या शलजम के पौधों जैसे होते हैं। इसके पत्ते व कंद भी मूली व शलगम के पत्तों एवं कंद जैसे ही होते हैं. पर कंद, मूली की कंद से अधिक स्थूल और गोल होती है।


चुकन्दर लाल और सफेद दो रंगों का होता है। लाल चुकन्दर को काटने से उसमें से जो रस निकलता है वह भी लाल रंग का होता है।


Beetroot in hindi-चुकन्दर(beetroot) को हिन्दी में चुकन्दर; बंगला में पलंग साग, विट पलंग; Chukandar in English- अंग्रेजी में शुगर बीट (Sugar beet); तथा लैटिन में बेटा वल्गैरिस (Beta vulgaris) कहते हैं।


रासायनिक विश्लेषण


चुकन्दर में प्रोटीन १०.७ प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट १३.६ प्रतिशत,कैल्सियम०.२० प्रतिशत,फॉस्फोरस ०.०६ प्रतिशत, खनिज पदार्थ ०.६ प्रतिशत, जल ६२.६ प्रतिशत, तथा लोहा १ मिलीग्राम प्रति १०० ग्राम, विटामिन सी ६६ मिलीग्राम, विटामिन बी १७ इं० यू० और विटामिन ए नाम मात्र को होता है। चुकन्दर में एक विशेष तत्त्व बीटिन (Betin) नामक भी होता है जो बड़ा प्रभावशाली होता है ।


चुकन्दर में यद्यपि चीनी की मात्रा अधिक होती है, पर वह चीनी गन्ने की चीनी से घटिया दर्जे की होती है।


चुकन्दर की चीनी शरीर में गर्मी लाती है और स्फूर्ति बढ़ाती है, पर हृदय के लिए उपकारी नहीं है।


आयुर्वेदानुसार चुकन्दर, मधुर, सारक, पुष्टिकर, रक्तवर्द्धक, एवं मानसिक विकृति तथा शोथ आदि में लाभकारी है।


चुकन्दर की तरकारी खाने से काम-शक्ति बढ़ती है। चुकन्दर, मूली की भाँति कच्चा भी खाया जाता है।


लाल चुकन्दर,सफेद चुकन्दर की अपेक्षा अधिक पुष्टिकर और उपकारी होता है, और सफेद चुकन्दर सारक और मूत्रल होता है।


चुकन्दर के व्यञ्जन


चुकन्दर की तरकारी


चुकन्दर एक अच्छी कंद भाजी है जो कच्ची और पकाकर-दोनों प्रकार से खायी जाती है। इसमें और भाजियों की अपेक्षा शक्कर की मात्रा अधिक होती है। इसलिये यह शरीर में गर्मी और फुर्ती बढ़ाने में अद्वितीय है। इसके पचने में भी अधिक देर नहीं लगती,पौष्टिक भी होती है। परन्तु यह पाचक और शीघ्र पचने वाली तभी होती है जब कंद के साथ इसके पत्ते भी खाये जायें।


चुकन्दर कार्तिक से माघ तक खूब मिलता है। उन दिनों इसकी तरकारी जरूर खानी चाहिए।


चुकन्दर की तरकारी बनाने के लिए उसकी जड़ और पत्तियों को काटकर एक साथ थोड़े पानी में उबालकर नरम कर लेना चाहिए। उबालने के बाद जो पानी बच रहे उसे फेंकना नहीं चाहिए अपितु उसी में सुखा देना चाहिए या पकती दाल वगैरह में डाल देना चाहिए। अथवा तरकारी को शोरबादार ही रखकर खाना चाहिए। उबलने के बाद चुकन्दर की तरकारी में स्वाद के लिए अन्दाज से नमक-मिर्च मिलाकर उसे उपयोग में लाना चाहिए। इस तरकारी में अधिक मसाला-तेल डालकर इसके गुणों को नष्ट नहीं करना चाहिए।




Chukandar khane ke fayde


Chukandar khane ke fayde


पेशाब की जलन)-चुकन्दर को पानी में उबाल-कर और मसलकर उसका पानी छान लें। आधी छटाँक से १ छटाँक इस पानी को दिन में ३-४ बार पीने से पेशाब की जलन शान्त हो जाती है और गुर्दो की सूजन भी मिट जाती है।


पथरी रोग)-चुकन्दर को पानी में उबालकर और मसलकर छान लें। आधी छटाँक से एक छटाँक यह पानी दिन में ३-४ बार पीवें तो कुछ ही दिनों में गुर्दो की पथरी गल कर निकल जायगी।


रक्त की कमी)-चुकन्दर की तरकारी, उसका रस या सलाद खाने से रक्त की कमी दूर हो जाती है।


रुका मासिक)-चुकन्दर को पानी में उबालकर और खूब मसल कर छान ले। उसे आधे से एक छटाँक की मात्रा से दिन में ३-४ बार पीने से शीत से बंद मासिक होने लगता है।


माता के स्तन में दूध की कमी)-नियमित रूप से चुकन्दर का सेवन करने से दूध पीते बच्चे की माता के स्तन में दूध की वृद्धि हो जाती है।


बदरंग नाखून)-चुकन्दर नियमित रूप से सेवन करते रहने से बदरंग नाखून सुन्दर हो जाते हैं, क्योंकि कैल्सियम और विटामिन डी का शरीर में अभाव हो जाने के कारण नाखून बदरंग हो जाते हैं। और चुकन्दर के खाने से शरीर को इन दोनों तत्त्वों की प्राप्ति होती है ।


गर्भाशय के रोग)-नियमित रूप से चुकन्दर का सेवन करने से गर्भाशय के लगभग सभी रोग मिट जाते हैं ।



दाद)-चुकन्दर के पत्तों के रस में शहद मिलाकर लगाने से दाद अच्छा हो जाता है ।


गंज)-चुकन्दर के पत्तों को हल्दी के साथ पीस- कर सिर पर लेप करने से, अथवा केवल पत्तों के रस को सिर पर लगातार लगाते रहने से सिर के बाल पुनः उग आते हैं ।


हाथ)-पेरों का फटना-चुकन्दर के काढे से हाथ पैरों को धोने या उन्हें उसी काढ़े में रखने से हाथ- पैरों का फटना बंद हो जाता है ।


कान का दर्द)-चुकन्दर के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ख़तम हो जाता है।

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