Ginger in Hindi| Ginger meaning in Hindi,Adrak.

 



Ginger in Hindi

Ginger in Hindi|अदरक


 Ginger in hindi- जिंजर को हिंदी में अदरक कहते है और  Ginger meaning in hindi-अदरक को हिन्दी में अदरक व अदरख।

 संस्कृत में आर्द्रक, शृङ्गवेर, कटुभद्र आदि; मराठी में आले; बंगाली में आदा; गुजराती में आदु और अरदु।

Adrak in English - अदरक को अंग्रेजी में जर रूट (Ginger root); तथा लैटिन में जिंजी बेर आफ्फिसीनेल (Zingi ber officinale) कहते हैं । 


विवरन


स्कृत में आर्द्र का अर्थ है गीला। चूंकि अदरक का खास गुण गीलापन है इसीलिए संस्कृत में इसको आर्द्रक कहते हैं। यही आर्द्रक जब सूख जाता है तो उसका नाम बदलकर सोंठ हो जाता है। 


अदरक सम्पूर्ण भारत में कमोवेश पाया जाता है, किन्तु मद्रास, कोचीन, बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में यह प्रचुरता के साथ पाया जाता है। जिन जगहों में आलू, मूली और शकरकंद पैदा होती है वहाँ उसकी उपज अच्छी होती है। 


अदरक का बीज नहीं होता। अतः इसके बोने में इसके छोटे छोटे टुकड़े काम में लाये जाते हैं। यह आलू की तरह जमीन के नीचे बैठती है और उत्पन्न होने पर डेढ़ हाथ तक लम्बी होती है । अदरक के पत्ते बाँस के पत्तों की तरह किन्तु उनसे छोटे होते हैं। अदरक चैत-बैसाख में बोया जाता है और आश्विन एवं कात्तिक में खोदकर निकाल लिया जाता है। मध्य प्रदेश के छिन्दवाड़ा क्षेत्र में बिना रेशे का अदरक मिलता है। अदरक का फूल जामुनी रंग का होता है, पर कभी-कभी ही देखने में आता है। 




भोजन से पूर्व इसके टुकड़ों पर नमक छिड़ककर खाने से अरुचि मिटती है, तथा गला साफ होकर क्षुधा बढ़ती है। आयुर्वेद में इसे वीर्यजनक इसलिए कहा है क्योंकि यह भोजन को भली भाँति पचाकर रस रक्त आदि धातुओं के पोषण में सहायता करता है। यह पक्वाशय, यकृत तथा समस्त पाचन संस्थानों को सक्रिय बनाता है और शक्ति प्रदान करता है। शरीर में वायु तथा कफ के उपद्रवों का शमन करने के लिए अदरक अन्य औषधियों के साथ प्रयुक्त होता है। 


आयुर्वेदानुसार कुष्ठ, पाण्डु, मूत्रकृच्छ्र, रक्त-पित्त, ज्वर, दाह, तथा व्रण-रोगों में और पित्त एवं उष्ण प्रकृतिवालों को ग्रीष्म व शरद ऋतु में बिना जरूरत अदरक का सेवन वर्जित है, क्योंकि इन अवस्थाओं में अदरक के सेवन से शरीर में पित्त का प्रकोप तथा कफ का नाश होकर शरीर को हानि पहुँचने की सम्भावना रहती है। अदरक का रस आधा तोला से एक तोला तक तथा कल्क ५ ग्राम से १५ ग्राम तक प्रयोग में लाना चाहिए।


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Adrak khane ke Fayde

 


Adrak khane ke Fayde



मन्दाग्नि)-अदरक में सेंधा नमक लगाकर खाने से मन्दाग्नि दूर होती है। 


भूख न लगना)-भोजन करने के १ घंटा पहले आधा तोला अदरक के टुकड़े काला या सेंधा नमक के साथ खाने से भूख खुलकर लगने लगती है। 



कब्ज)-अदरक और गुड़ खाने से कब्ज में लाभ होता है। 


अरुचि)-अदरक, पुदीना, सेंधा नमक और हरी मिर्च की चटनी बना और उसमें नींबू का रस मिला भोजन के साथ खाने से अरुचि में लाभ होता है। अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से भी अरुचि दूर होती है।। 


वमन)-अदरक का रस १ तोला व प्याज का रस १ तोला मिलाकर पीने से वमन बंद हो जाती है।


 उदर-वाय)-भोजन करने के पहले अदरक, सेंधा नमक और नींबू का रस एक साथ खाने से पेट की वायु शान्त होती है। 


पेट में गैस बनना)-कच्चा अदरक आधा तोला, सेंधा नमक आधा तोला, सौंफ आधा तोला, मुनक्का आधा तोला, काली मिर्च आधा तोला या १५ दाने- सबको चटनी की तरह पीसकर भोजन के साथ सुबह- शाम खाने से दो बार ही में पेट में गैस बनना बंद हो जायगा। पूर्ण आराम के लिए ४-५ दिन लग सकते हैं । 


उदरशूल)-अदरक के रस में अजवाइन को भिगोए, फिर मसल कर सुखा लेवें और खायँ तो उदर-शूल शान्त हो जाता है। 


आन्त्रपुच्छ-प्रदाह)-भोजन के पहले अदरक व नमक के साथ लाल टमाटर खाने से आन्तरपुच्छ-प्रदाह में लाभ होता है । 


अदरक का रस और पीपल की बुकनी को लेकर शहद के साथ चाटने से खाँसी में आराम मिलता है । 


कफ युक्त खाँसी)-अदरक और गुड़ एक साथ मिलाकर इस्तमाल करने से तर खाँसी ठीक होने लगती  है ।


 जुकाम)-(१) अदरक और तुलसी के पत्तों को बारीक पीस लें । फिर एक कटोरी को आग पर रखें । उसमें थोड़ा सा घी डालकर लुगदी को डाल दें। अच्छी तरह भुन जाने पर थोड़ा ठंढा करके गूड़ मिलाकर खा लें । उसके बाद ठंढा पानी न पीवें, जुकाम ठीक हो जायगा ।


(२) अदरक ४ रक्ती लौंग २ दाने, मिर्च काली ५ दाने, सेंधा नमक २ रत्ती, तुलसीपत्न ५- सबको ५ तोला जल में पकावें । जब २-३ तोला जल रह जाय तो मिश्री मिलाकर पीवें, जुकाम २-३ दिन में ठीक हो जायगा । 


(३) अदरक का रस छः माशा व शहद छः माशा मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से भी जुकाम ठीक हो जाता है । 


(४) अदरक, दालचीनी, कालीमिर्च तथा अम- रूद के ५-७ हरे पत्तों की चाय बनाकर पीने से भी सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है । 


ब्रान्काइटिस)-अदरक, मुनक्का, और बादाम बराबर-बराबर लेकर और पीस कर चाटने से ब्रान्का- इटिस अच्छी हो जाती है ।


हिचकी)-अदरक और गुड़ एकसाथ पीसकर खाने से हिचकी में तुरंत आराम मिलता है ।


 दिल की तेज धड़कन)-अगर आप अदरक को घी में तलकर खाते हो तो इस से दिल की तेज धड़कन में लाभ होता है । 


गठिया वात)-अदरक का रस और तिल का तेल-दोनों को एकसाथ पकाकर उससे मालिश करने से गठिया-वात में लाभ होता है ।

सूजन)-१ तोला अदरक के रस को २ तोले पुराने गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सूजन मिटती है, परन्तु सूजन मिटने तक पथ्य केवल बकरी का दूध रखना चाहिए ।


 बहुमूत्र )-अदरक के रस में मिश्री मिलाकर सुबह- शाम सेवन करने से बहुमूत्र रोग धीरे-धीरे दूर हो जाता है। 


अण्डवृद्धि)-वात विकार के कारण पुरुषों के अण्डकोष जब फूल जाते हैं तो रोज सुबह २ से ६ माशा तक अदरक का रस शहद मिलाकर चाटने से वे ठीक हो जाते हैं। दवा एक मास तक सेवन करनी चाहिए। 


 तो यह थी अदरक के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी। इस कांटेक्ट में मैंने आपको Adrak khane ke fayde, उससे होने वाले लाभ, अदरक का भिन्न-भिन्न बीमारियों में होने वाले लाभ तथा उनके बीमारियों में होने वाले प्रयोग के बारे में बताया है। अगर दोस्तों आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगी तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। हेल्थ रिलेटेड ऐसे ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए हमारे ब्लॉग पर विजिट करें।


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