Onion in Hindi|Pyaj,pyaj khane ke Fayde.

 

Onion in Hindi

Onion in Hindi


Onion in Hindi-संसार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने प्याज का नाम न सुना हो अथवा जो प्याज को न जानता हो। प्याज सब्जियों और मसालों का एक प्रमुख अंग . है, और लगभग हर घर में यह विद्यमान होता है और बड़े शौक के साथ खाया जाता है । 

संस्कृत में प्याज को पलाण्डु, सुकन्द, लोहितकन्द, तीक्षणकन्द, बहुपत्र, कृमिघ्न, यवनेष्ट, दुर्गन्ध, तथा मुखदूषक कहते हैं। Onion in Hindi-प्याज को हिन्दी में प्याज या पियाज, गुजराती में डूंगली, डंगरी और कांदो, मराठी में काँदा, बंगला में पेंयाज, पंजाबी में गाँडा,pyaj in English -अँग्रेजी में ओनियन (Onion), तथा लैटिन में ऐलियम सीपा (Alium cepa) कहते हैं ।


 प्याज(pyaj) के लिए गर्म व समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है। अतएव यह भारत के समस्त भागों में भोजन व मसाले के लिये बोया जाता है । पाँच पौण्ड बीज एक एकड़ भूमि में बोने के लिये पर्याप्त है । बोने का समय अगस्त से नवम्बर तक और पर्वतीय स्थलों में फरवरी से जून तक है । तीन-चार मास में फसल तय्यार हो जाती है। प्याज की फसल लाल, श्वेत व पीले रंगों में होती है।


Safed Pyaj-सफेद प्याज 


 सफेद प्याज (white onion) विशेषतः औषधियों के काम में आता है। प्याज की जड़ में एक गाँठ होती है जिसमें विशेष प्रकार के लगभग १-१ हाथ लम्बे पत्ते निकलते हैं। प्याज के पत्ते स्याही के समान हरे तथा भीतर से खोखले होते हैं। प्याज की गाँठ एक वर्ष तक सुरक्षित रह सकती है, किन्तु प्याज का बीज इतने समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। प्याज का पुराना बीज बोने से नहीं उगता।


बड़े प्याज में जल ८६%, प्रोटीन १.२%, वसा ०.१%, खनिज लवण ०.४%, कार्बोहाइड्रेट ११.६%, कैल्सियम ०.१८%, फॉस्फोरस ०.०५%, लोहा ०.७ मिली ग्राम प्रति १०० ग्राम, विटामिन बी, ४० इ० यू० प्रति १०० ग्राम, विटामिन सी ११ मिली ग्राम प्रति १०० ग्राम, तथा प्रति २॥ तोला १४ मिली ग्राम कैलोरियाँ प्राप्त होती हैं। #छोटे प्याज में जल ८४.३%, प्रोटीन १.८%, वसा ०.१%, खनिज लवण ०.३%, कार्बोहाइड्रेट १३.२%, कैल्सियम ०.०४%, फॉस्फोरस ०.०६%, लोहा १.२ मिली ग्राम प्रति १०० ग्राम, विटामिन ए २५ इ० यू० प्रति १०० ग्राम,विटामिन बी, ५० इ० यु० प्रति १०० ग्राम तथा विटामिन सी ११ मिली ग्राम प्रति १०० ग्राम । प्याज के डंठल में जल ८७.६%, प्रोटीन ०.६%, वसा०.२%,खनिज लवण ०.८%,कार्बोहाइड्रेट ८.६%, कैल्सियम ०.०५%, फॉस्फोरस ०.०५%, लोहा ७.५ मिली ग्राम प्रति १०० ग्राम होता है । प्रति २॥ तोला, १२ मिली ग्राम कैलोरियाँ प्राप्त होती हैं।


प्याज में से एक उड़नशील तेल निकलता है, जिसमें गंधक, ऐल्बूमेन, लेस, प्रस्फुटक अम्ल, चूने के सिट्रेट और लिग्लिन होते हैं। बीजों में से एक प्रकार का नीरंग स्वच्छ तेल निकलता है जो औषधियों के काम में आता है। सफेद प्याज गुरु, मधुर, पिच्छिल, स्निग्ध, रुचि- कारक, धातुओं को स्थिर करने वाला बल्य, बुद्धि- वर्द्धक, कफकारक, शरीरपुष्टिकर तथा रक्त-पित्त में हितकर होता है । लाल प्याज गुरु, तीक्ष्ण, शीतल, पित्तनाशक, कफ- निःसारक, दीपन, अतिनिद्राकर, वृष्य तथा स्निगध होता है। नाड़ीशुल, व्रण-शोथ, किलास, व्यङ्ग, न्यच्छ आदि मुख या चेहरे के विकारों में उपकारी होता है ।


Onion in Hindi-प्याज में सिलापिकरिन (Scillapicrine), सिला- मेरिन (Scillamarine) और सिलिनाइन (Scillinine) ये तीन तत्त्व कार्य करते हैं । यह हृदय की गति को मंद करता है। खाँसी, काली खाँसी, और पुरानी खाँसी में यह कफ निकालने के लिये दिया जाता है । फ्रांस में पिछले कई वर्षों से प्याज उपयोगी तथा शक्तिदायक पदार्थ के रूप में सेवन किया जाता है । रात भर मद्यपान करके नशे में रहने वाले व्यक्तियों पर प्याज का काढ़ी सन्तोषजनक तथा उत्तम प्रभाव करता है । फ्रांस में शायद ही कोई ऐसा होटल होगा जहाँ प्याज का काढ़ा तैयार न मिल सके ।


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pyaj khane ke Fayde

Pyaj khane ke Fayde


चिकित्सा सम्बन्धी उपयोग


रोगों की चिकित्सा में प्याज का उपयोग अति प्राचीनकाल से चला आ रहा है । चरक और सुश्रुत के सूत्रस्थानों में इसके गुणधर्म का उल्लेख मिलता है, तथा हारीत संहिता में भी । रक्त-पित्त, रक्तस्राव, निर्बलता आदि रोगों की चिकित्सा में चरक ने प्याज का उपयोग लिखा है ।


नीचे कुछ रोगों में प्याज के चिकित्सा सम्बन्धी उपयोग दिये जा रहे हैं:-


नामर्दी)-प्याज का रस और शुद्ध मधु २०-२० तोला लेकर एक में मिलावें और शर्बत बनावें । २॥ तोला की मात्रा से इस शर्बत को रोज सेवन करने से नामर्दी और काम-शक्ति की कमी में बड़ा लाभ होता है, साथ ही शरीर सबल और पुष्ट बनता है।


शीघ्रपतन)-आँवले के बराबर आँड़ी (गाँठ) वाले एक सेर गुलाबी रंग के प्याज एकत्र कर और ऊपर का छिलका उतारकर प्रत्येक प्याज में चौकोर चीरा मार कर रखें । फिर उन्हें २ सेर असली शहद में पकावें। जब २-३ जोश आ जायँ तो उतार लें। ठंढा हो जाने पर अमृतबान में रख लें। रोज रात में सोने जाने से पहले उसमें से एक प्याज निकालकर खा लें और ऊपर से १ पाव गाय का दूध पी लें। इस योग से शीघ्र- पतन का रोग तो दूर ही होगा, साथ ही वीर्य भी पुष्ट होगा और यदि नपुंसकता होगी तो वह भी नष्ट हो जायगी। इस प्रयोग को ४१ दिन तक चलाने से मर्दानगी की अपार शक्ति शरीर में भर जाती है और शरीर पर सुर्खी छाकर गई जवानी पुनः लौट आती है।


  स्त्रियों का रुकामासिक)-एक किलो जल में ५ तोला प्याज के टुकड़े डालकर काढ़ा बनावें । उस काढ़े में ३ तोला पुराना गुड़ मिलाकर और गरम कर रोगिणी को पिलावें । ऐसा कुछ दिनों तक करने से उसका रुका मासिक खुल जायगा, तथा यदि रोगिणी को कष्ट से मासिक होता होगा तो वह भी मिट जायगा ।


बच्चों के पेट की पीड़ा)-प्याज का दो-तीन बूँद रस शुद्ध शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों के पेट की पीड़ा दूर हो जाती है ।


बच्चों के पेट के कीड़े)-प्याज का कच्चा रस उम्र के लिहाज से बच्चों को पिलाने से उनके पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं ।


पेशाब का रुकना)-एक प्याज को गरम राख में भूनकर और उसे चीर कर बच्चे के मूत्राशय पर गरम-गरम बाँध देने से उसका रुका हुआ पेशाब उतर आता है ।


बच्चों की बाढ़ रुकना)-प्याज व गुड़ का सेवन कराने से बच्चों की बाढ़ अच्छी होती है । वह रुकती नहीं।


स्कर्वी)-रोज सुबह-शाम भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन करते रहने से कुछ ही दिनों में स्कर्वी- रोग से छूटकारा मिल जाता है ।


भूख न लगना)-रोज भोजन के साथ एक या आधा कच्चा प्याज खाने से कुछ ही-दिनों में भुख खुलकर लगने लगेगी ।


अजीर्ण)-भोजन करते वक्त सिरके के साथ प्याज का सेवन करने से अजीर्ण में लाभ होता है । कच्चे प्याज के रस में नमक मिलाकर पीने से भी अजीर्ण में लाभ होता है ।


कब्ज)-भोजन के साथ रोज प्याज का सेवन करने से कब्ज दूर हो जाता है।


बवासीर)-भोजन के साथ प्याज का सेवन करने से बादी बवासीर में लाभ होता है । यदि बवासीर खूनी हो तो प्याज को घी में पकाकर खाना चाहिए । पतले दस्त-प्याज को पीसकर नाभि पर लेप करने से पतले दस्त आने बंद हो जाते हैं ।


मतली)-प्याज को नमक के साथ खाने से मतली आनी बंद हो जाती है ।


प्लीहा-विकार) -भोजन के साथ रोज सिरके में डाला हुआ प्याज खाने से प्लीहा-विकार शान्त होता है ।


पेट-पीड़ा)-प्याज को आग की भूभल में गरम कर और कुचलकर उसका रस पानी में निचोड़ लें । तत्पश्चात् उसमें एक माशा नमक मिलाकर पेट-पीड़ा के रोगी को पिलावें, तत्काल लाभ होगा। केवल प्याज के कच्चे रस में नमक मिलाकर पीने से भी वही लाभ होता है ।


कष्ट से पेशाब आना)-आधे किलो जल में ६ ग्राम प्याज के टुकड़े डालकर उसका काढा बनाये और जिसे पेशाब करने में कष्ट का अनुभव होता हो उसे पिलायें तो पेशाब खुलकर आने लगेगा । इस प्रयोग के करने से रुका हुआ पेशाब भी खुल जाता है और मूत्र-दाह भी मिटता है ।


फेफड़े व श्वास)-नली के रोग-प्याज को कुचल कर और साफ रुई में लपेट कर एक डिब्बी में रखें और उसका नास लेते रहें । ऐसा करने से टान्सिल, खाँसी, श्वास रोग, फेफड़े के क्षय, गले तथा श्वास- नली के रोगों में लाभ होता है ।


जुकाम)-रात को सोते समय प्याज की एक कच्ची गाँठ खा लेने से जुकाम ठीक हो जाता है ।


दमा)-सफेद प्याज का रस १ तोला व मधु १ तोला, दोनों को मिलाकर रोज सूर्योदय से प्रथम सेवन करने से ४० दिन में पैत्रिक दमा में अपूर्व लाभ होता है ।


राजयक्ष्मा)-प्याज का रस या कच्चे प्याज को नमक के साथ खाने से राजयक्ष्मा में लाभ होता है। प्याज का ८ बूंद रस थोड़े पानी में मिलाकर दिन में ३ बार लेवें ।


Pyaj


नकसीर)-प्याज के दो टुकड़े करके गर्दन में बाँध रखने से नकसीर आराम हो जाता है । प्याज के रस, प्योज के पत्तों के रस, या प्याज के रस में डालकर पकाये हुए भेंस या बकरी के घी की नस्य देने से भी लाभ होता है ।

दाद)-प्याज के बीजों को सिरके के साथ पीसकर दाद पर लगाने से वह कुछ ही दिनों में मिट जाता है । सफेद दाग-प्याज के बीजों को गोमूत्र में पीस- कर दागों पर लेप करने से कुछ ही दिनों में सफेद दाग नष्ट हो जाते हैं ।


बाल झड़ना)-प्याज को पीसकर और उसमें शहद मिलाकर सिर पर लेप करने से सिर के बालों को झड़ना रुक जाता है।


गंजा सिर)-प्याज के टुकड़े करके उन टुकड़ों को सिर के बालों की जड़ पर रगड़ें। तत्पश्चात् उस स्थान पर शहद से मालिश करें और छोड़ दें। १ घण्टे बाद जल से धोकर शुद्ध रेंड़ी का तेल लगावें । ऐसा कुछ दिन करें तो गंजे सिर पर बाल उगने लगेंगे ।


लू के कारण सिरदर्द)-प्याज को महीन पीसकर पैरों के तलुओं पर लेप करने से लू के कारण जो सिर- दर्द होता है उसमें लाभ होता है ।


रतौंधी)-अगर तेज धूप के कारण रतौंधी होती हो तो नेत्रों में प्रतिदिन २-२ बूँद प्याज का तोजा रस डालने से वह ठीक हो जाती है। रस में जरा सा नमक मिला लेने से जल्दी लाभ होता है ।


मोतियाबिन्द )- प्याज का रस और शहद बराबर- बराबर मिलाकर कुछ दिनों तक लगाते रहने से मोतिया- बिन्द में लाभ होता है । केवल प्याज का रस तीन गुने पानी में मिलाकर डालना भी लाभकारी है । दाँत का दर्द-दुखते दाँतों के नीचे प्याज का एक टुकड़ा दबा रखने से दाँत का दर्द अच्छा हो जाता है ।


मसूढ़ों की सूजन)-प्याज के टुकड़ों के साथ कलौंजी बराबर की मात्रा में मिलाकर मुँह में तब तक रखें जब तक कि मुँह में राल न भर जाय और वह गिरने न लगे । यह योग मसूढ़ों की सूजन व दर्द, दोनों के लिये अक्सीर है ।


दाँत में कीड़ा लगना या पायरिया)-प्याज को गरम करके उसे दाँतों के बीच रखिए, दाँत के कीड़े मर जायँगे और पायरिया ठीक हो जायगा ।

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