Shahad ke Fayde in Hindi|Honey in Hindi.



Shahad ke fayde in Hindi

शहद के फायदे। Shahad ke fayde in Hindi,Honey in Hindi.


शहद(shahad ke fayde in Hindi) एक अमृतोपम खाद्य पदार्थ है। जिस किसी मीठी चीज की हमें तारीफ करनी होती है तो हम उसकी उपमा शहद से देते हैं और कहते हैं 'यह तो शहद जैसी मीठी है। प्राचीन समय में संसार में शहद ही मुख्य मधुर पदार्थ था । 

आयुर्वेद में शहद की चर्चा विस्तृत रूप से की गयी है। वैद्यक-शास्त्र तो शहद की महिमा गाते नहीं थकता। वेदों और शास्त्रों में शहद की गणना पवित्र पदार्थों में की गयी है, और पुराणों में वर्णित दुग्ध आदि के सात समुद्रों में एक मधु के समुद्र की भी कल्पना की गयी है। ईसाइयों और मुसलमानों के धर्म ग्रन्थों में भी शहद स्वर्गीय पदार्थ माना गया है। धार्मिक कृत्यों में शहद का प्रयोग आदि काल से होता चला आ रहा है। 

बालक के जन्मते ही उसको घी मिश्रित शहद चटाकर उसका जातकर्म-संस्कार किया जाता है। विवाह-संस्कार में भी मधु के बिना मधुपर्क- विधि सम्पन्न नहीं होती। इसी प्रकार उपनयन आदि लगभग सभी संस्कार में बिना शहद के काम नहीं चलता। दूध, घी, दही, शहद और मिश्री, पञ्चामृत कहलाते हैं, जिससे भगवान् का स्नान और पूजन होता है । अर्थात्, यदि शहद का संयोग न हो तो भगवान् की पूजा के लिये पञ्चामृत बन ही नहीं सकता। चैत्र, वैशाख मासों के नाम शहद अथवा मधु के नाम पर ही 'मधुमास' पड़ा है। यात्रा आरम्भ करने के पूर्व मधु मिला दही खाना शुभ माना जाता है। यहाँ तक कि एक हिन्दू के मरने के बाद बिना शहद के श्राद्ध एवं पिण्ड- दान भी पूरा नहीं होता है।

 प्राचीन यूनान की दंत-कथाओं में देवताओं के भोजन 'एम्ब्रोसिया' की, जो शहद से ही बनता था, भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी है। रूस देश शहद के चमत्कारी प्रभाव से सदा प्रभावित रहा और आज भी है। प्राचीन चीन में भी शहद को पवित्र और स्वास्थ्यवर्द्धक पदार्थ मान- कर उसका प्रयोग आहार और औषधि के रूप में, प्रचुरता से होता था। चीन ही क्यों, संसार के सभी देशों के साधारण जन चिरकाल से शहद को रोगों के निवारण में प्रयोग करते आ रहे हैं ।

Honey in Hindi


 प्राचीन मिस्र की चित्रलिपियों में शहद के गुणकारी प्रभावों का वर्णन पाया गया है। प्राचीन काल के महान हकीम तथा चिकित्सा-शास्त्र के पिता हिपोक्रट्स' शहद के सेवन से ही १०७ वर्ष तक जिये। वह शहद से ही कितने ही रोगों का इलाज सफलता के साथ करते थे । इतिहास- कार 'नेस्टर' के, जो ११ वीं शताब्दी में हुआ था, ऐति- हासिक विवरणों में हम रूस में मधु-मक्खी-पालन में प्राप्त उच्च स्तरीय प्रवीणता का वर्णन पाते हैं। उस प्राचीनकाल में ही रूसी मधु का संसार के भिन्न-भिन्न देशों को विस्तृत रूप से निर्यात होता था। 

सोवियत शासन काल में वैज्ञानिकों ने नये ढंग से मानव-शरीर पर शहद के प्रभाव का सर्वांगीण अध्ययन किया और उससे विविध रोगों की चिकित्सा पर आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त किए। खेद है, जो अमृत तुल्य शहद आदिकाल से मानव- भोजन का एक परमावश्यक अंग रहता चला आया है, उसको आज हम भारतवासी विष तुल्य सफेद चीनी के आगे भूले से जा रहे हैं। 

संसार के अन्य देशों, जैसे अमेरिका, युरोप, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आदि के शहद-व्यवसायी तो शहद की पैदावार को आज भी टनों और वैगनों में तौलते हैं। एक संयुक्त राज्य में ही शहद की पैदावार औसतन १७,२२,२६,८७० पौंड है। अमेरिका को हर साल शहद के व्यवसाय से लग- भग ९ करोड़ रुपये का लाभ होता है।

 शहद के अनेक नाम( Many names of honey)


सोम, प्राण, देवभोजन, आयु, पुष्प-रस, पुष्प रसोद्भव, पुष्पासव, माक्षीक, सारध, क्षौद्र, मधु, माध्वीक, तथा पित्र्य, आदि शहद के अनेक नाम हैं। अंग्रेजी में इसे 'हनी' और लैटिन में 'मेल' कहते हैं।

 
      शहद कैसे बनता है ?How is honey made?

 
इस वैज्ञानिक युग में भी शहद का बनाना मनुष्य के बस की बात नहीं है। इसे तो केवल मधु-मक्खियाँ और एक खास जाति के भौंरे ही बना सकते हैं। चीनी, गुड़, मनुष्य अपने बुद्धिबल से मशीन द्वारा तय्यार कर सकता है। पर शहद मशीन द्वारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता । शहद तो वस्तुत: प्रकृति का एक वरदान है जो मधु-मक्खियों द्वारा ही हमें प्राप्त होता है।

यह भी पढ़ें:-बरगद के चमत्कारिक फ़ायदे (Bargad ke dudh or fal ke Fayde )


Shahad khane ke fayde


            Shahad khane ke fayde 

 

                         सर्दी-जुकाम


शहद का नित्यप्रति सेवन करनेवाला सर्दी-जुकाम से बचा रहता है । एक प्याला गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़कर और रुचि के अनुसार उसमें शहद मिलाकर रात को सोने से पहले पी जायँ, तो दो-तीन दिनों में सर्दी जुकाम ठीक हो जायगा। दिन में तीन-चार बार तुलसी की पत्तियों की चाय में शहद मिलाकर पीने, दो छटाँक गुनगुने पानी में आधा तोला शहद मिलाकर नाक के रास्ते सुड़ककर मुखसे निकालने, तथा पाँच तोले शहद में १३ माशा फिटकरी, ८ छटाँक पानी, और १३ माशा नमक मिलाकर गरारा करने से बिगड़े से बिगड़ा जुकाम भी ठीक हो जाता है।

 
              मोटापा और कफ विकार


मोटापा और कफ-विकार को दूर करने के लिये शहद से बढ़कर दुनिया में अन्य कोई वस्तु नहीं है। मोटापा वास्तव में सारे शरीर का कब्ज है। अत: शहद जो कब्ज को दूर करने में अद्वितीय है, मोटापा की भी रामबाण औषधि है। मोटापा दूर करने के लिये प्रतिदिन प्रात:- काल खाली पेट ठंढे पानी और शहद का एक गिलास घोल कुछ दिनों तक पीना चाहिए।

 
                      भूख न लगना

 
आधा कागजी नींबू का रस और शहद गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से भोजन जल्द हजम होता है, भूख खुलकर लगती है, तन्दुरुस्ती ठीक रहती है, खून साफ होता है, तथा नया रक्त बनता है।

 
                वीर्य-दोष, नामरदी, प्रमेह

 
दूध में शहद मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से नामर्दी, प्रमेहादि सभी वीर्य दोष दूर हो जाते हैं। कारण, दूध में फलों की शर्करा जो पौष्टिक होती है, बहुत कम होती है जिसकी कमी शहद के योग से पूरी हो जाती है, जिससे शहद-दूध का मिश्रण शरीर के लिये अमृत का काम करता है । प्रमेह में तो केवल शहद-रोटी के भोजन से ही लाभ होते देखा गया है । बरसात के पानी के साथ शहद का सेवन मैथुन-शक्ति की कमी को दूर करता है।


                    बालों का झड़ना

 
एक भाग शहद को दो भाग नींबू के रस के साथ मिलाकर, बालों की जड़ों में रोज मलने और थोड़ी देर बाद धो डालने से कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना बंद हो जाता है ।

 
                         नेत्र-रोग

 
नेत्र-रोगों के लिये शहद, विशेषकर कमल का शहद, एक ही दवा है। इसके लिये रात को सोते समय शहद पानी से आँखों को धोकर शहद का अंजन लगाना चाहिए, या शहद की एक बूँद रोगी की आँख में टपकाना चाहिए ।


                       पेट में कीड़े


पेट और आँतों में अधिक गंदगी जमा हो जाने के कारण वहाँ छोटे-बड़े अनेक प्रकार के कीड़ों की उत्पत्ति हो जाती है, जिससे आदमी का पोषण रुक जाता है और शरीर पीला पड़कर छीजने लगता है । ऐसी दशा में शहद को दही के साथ सेवन करने से कुछ ही दिनों में पेट के कीड़े मर कर बाहर निकल आते हैं और नये कीड़ों की उत्पत्ति बंद हो जाती है ।

 
                      अनिद्रा-रोग

 
नींद न आने की बीमारी बड़ी बुरी होती है। रात को सोते समय एक चम्मच शहद ठंढ़े पानी से मिलाकर नित्यप्रति पीने से थोड़े ही दिनों में अच्छी नींद आने लगती है ।


                        निमोनिया 

 
निमोनिया में फेफड़ों में कफ जकड़ जाता है जिससे रोगी की दशा बहुत बिगड़ जाती है और कभी-कभी तो जान पर ही आ बनती है। ऐसी दशा में शहद का प्रयोग गुनगुने पानी के साथ बहुत लाभ करता है। स्मरण रहे, कफ छाँटने के लिये शहद से बढ़कर गुण- कारी वस्तु और कोई नहीं है ।

 
                         पीलिया


पीलिया-रोग में रोगी का शरीर, आँखें, मल, मूत्र, पसीना, आदि सभी पीले रंग का हो जाता है, कम- जोरी बढ़ जाती है और रोगी को कभी-कभी ज्वर भी आ जाया करता है। इस रोग में रोगी को दिन में तीन बार शहद का एक गिलास शरबत आधे कागजी नींबू का रस मिलाकर देना चाहिए । थोड़़े दिनों में सब शिकायतें दूर हो जायँगी ।

 
                      अपच और कब्ज

 
सभी डाक्टर और वैद्य इस तथ्य से एकमत हैं कि दुनिया में जितने भी रोग हैं लगभग सभी की उत्पत्ति अपच और कब्ज से होती है। इसलिये कब्ज या कोष्ठबद्धता को रोगों की नानी कहा जाता है । शहृद अपच को दूर करता है और कब्ज को तोड़ता है। क्योंकि यह हल्का और रेचक होता है, जिससे पेट आसानी से साफ हो जाया करता है। शहद में पाया जानेवाला वसा-अम्ल आँतों में गति उत्पन्न करता है।


जिससे शहद सेवन करनेवाले को कोष्ठबद्धता-रोग कभी नहीं सताता। साथ ही शहद जठराग्नि को प्रदीप्त करने- वाला होने के कारण शहद अपच होने को रोकता है ।

 
रात को सोते समय एक चम्मच शहद ठंढ जल में पीने से सबेरे अच्छा शौच हो जाता है। एक छटाँक शहद और एक कागजी नींबू का रस ठंढे पानी में मिलाकर रोज प्रातःकाल पीने से कुछ ही दिनों में भयानक से भयानक कब्ज भी दूर हो जाता है।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां